13-May-2026
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- कुएं में मिली पिता संग दो मासूमों की लाश, गमछे से बंधे थे बच्चे, दफन हुई तीन जिंदगियां - कटंगी थाना क्षेत्र के ग्राम जरामोहगांव की घटना ने झकझोरा मौत से पहले भी बच्चों को सीने से बांधे रहा पिता, कुएं से निकली दिल दहला देने वाली तस्वीर एलआईसी एजेंट पिता रात में बच्चों को लेकर निकला था घर से बालाघाट (ईएमएस). जिले के कटंगी थाना क्षेत्र के जरामोहगांव में बुधवार को सामने आई एक दर्दनाक घटना ने हर दिल को भारी कर दिया। एक पिता और उसके दो नन्हे बच्चों के शव जब कुएं से बाहर निकाले गए, तो वहां मौजूद हर आंख नम हो गई। सबसे पीड़ादायक दृश्य वह था, जब दोनों मासूम अपने पिता के शरीर से गमछे में बंधे मिले—जैसे आखिरी पल तक वह उन्हें अपने से अलग नहीं करना चाहता था। यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि कई अनुत्तरित सवालों और टूटे हुए रिश्तों की मूक कहानी बन गई है। जानकारी के मुताबिक जरामोहगांव निवासी श्याम पिता भागवत नागेन्द्र, जो पेशे से एलआईसी एजेंट था, मंगलवार रात करीब 8.30 से 9 बजे के बीच अपने 5 वर्षीय बेटे वंश और 3 वर्षीय बेटी भूरी को साथ लेकर घर से निकला था। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह साथ उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। रात गहराती गई, लेकिन श्याम बच्चों के साथ वापस नहीं लौटा। शुरुआत में परिजनों ने ज्यादा चिंता नहीं की—गांव में दो शादियां थीं, उन्हें लगा कि वह वहीं होगा। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, एक अनजाना डर दिलों में घर करने लगा। इस मामले में एसडीओपी विकास सिंह के अनुसार, कुएं से तीनों शवों को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए कटंगी अस्पताल भेजा गया है। मर्ग कायम कर हर पहलू से जांच की जा रही है। पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा। रात्रि में नहीं लौटा घर, लावारिस मिली बाइक, कुएं के पास मिली चप्पल परिजनों ने जब तलाश शुरू की, तो गांव के पट मैदान के पास श्याम की बाइक लावारिस हालत में खड़ी मिली। यह दृश्य ही किसी अनहोनी की आहट देने के लिए काफी था। सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची और खोजबीन तेज की गई। कुछ ही दूरी पर एक बिना मुंडेर वाले कुएं के पास श्याम की चप्पलें मिलीं—और यहीं से उम्मीदों की आखिरी डोर भी टूटने लगी। बुधवार को उसी कुएं से तीनों के शव बरामद किए गए। बताया गया है कि श्याम का अतीत भी संघर्षों से भरा रहा। वह पहले सहारा बैंक में कंप्यूटर ऑपरेटर था, लेकिन कंपनी बंद होने के बाद जिंदगी की गाड़ी पटरी से उतर गई। इसके बाद उसने एलआईसी एजेंट के रूप में काम शुरू किया, लेकिन हालात शायद उसके मन पर भारी पड़ते गए। खाट के सहारे निकाले गए शव बगैर मुंडेर वाले कुएं में ग्रामीणों की मदद से जब खाट के सहारे शवों को बाहर निकाला गया, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति का कलेजा कांप उठा। दोनों मासूम बच्चों के नन्हे शरीर अपने पिता से गमछे में बंधे हुए थे—मानो डर, दर्द या अंधेरे में भी उन्होंने पिता का साथ नहीं छोड़ा या शायद पिता ने उन्हें छोडऩा नहीं चाहा। इंस्टा स्टोरी ने बढ़ाए सवाल, जांच में जुटी पुलिस घटना के बाद एक और पहलू सामने आया है, जिसने इस दर्द को और गहरा कर दिया है। श्याम की इंस्टाग्राम स्टोरी—जिसमें उसने लिखा था, च्च्जीने की आरजू नहींज्ज्—अब एक खामोश चीख की तरह महसूस हो रही है। एक भावुक वीडियो के साथ लिखे शब्द—च्च्नहीं है जिंदा रहने की आरजू, नहीं चाहिए कोई वादा या रिश्ताज्ज्—जैसे उसके भीतर चल रहे तूफान की झलक दे रहे थे। फिर भी, गांव के लोगों के मन में एक ही सवाल गूंज रहा है—अगर उसने इतना बड़ा कदम उठाना ही था, तो इन मासूमों का क्या कसूर था? क्या वे पिता के दर्द से अनजान होकर भी उसकी दुनिया का हिस्सा बन गए? हादसे ने खड़े किए अनेक सवाल जरामोहगांव की यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ा एक आईना है—जहां मानसिक तनाव, आर्थिक दबाव और भीतर ही भीतर टूटते इंसान की कहानी साफ नजर आती है। दो मासूम जिंदगियां, जो अभी दुनिया को समझ भी नहीं पाई थीं, हमेशा के लिए खामोश हो गईं। पीछे रह गया है तो सिर्फ सन्नाटा, आंसू और एक सवाल—क्या हम अपने आसपास के टूटते हुए लोगों को समय रहते पहचान पाते हैं या फिर हर बार बहुत देर हो जाती है? भानेश साकुरे / 13 मई 2026