अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में हुआ खुलासा वॉशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिनमें वे ईरान की सैन्य ताकत को लगभग खत्म बता रहे थे। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक गुप्त रिपोर्ट (सीक्रेट असेसमेंट) में खुलासा हुआ है कि ईरान अब भी अपनी अधिकांश मिसाइल साइट्स और सैन्य ढांचे पर नियंत्रण बनाए हुए है। वहीं फिलहाल व्हाइट हाउस इन रिपोर्ट्स को भ्रामक बता रहा है, लेकिन खुफिया आंकड़ों ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान अब भी पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ा है और क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर अमेरिकी हितों के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, सामरिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित ईरान की 33 मिसाइल साइट्स में से 30 अब भी सक्रिय या आंशिक रूप से कार्य कर रही हैं। यह वही क्षेत्र है जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। खुफिया रिपोर्ट यह भी बताती है कि ईरान अपने 70 प्रतिशत मोबाइल मिसाइल लॉन्चर और लगभग 70 प्रतिशत प्री-वॉर मिसाइल स्टॉक को सुरक्षित रखने में सफल रहा है। इनमें वे बैलिस्टिक मिसाइलें भी शामिल हैं, जो पूरे मध्य पूर्व को निशाना बनाने में सक्षम हैं। इसके अलावा, ईरान के 90 प्रतिशत अंडरग्राउंड मिसाइल स्टोरेज और लॉन्च फैसिलिटी फिर से ऑपरेशनल मानी जा रही हैं। ट्रंप प्रशासन के दावों और हकीकत में अंतर यह रिपोर्ट राष्ट्रपति ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बयानों के ठीक विपरीत है। मार्च में ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान की जल, थल और नभ सेना पूरी तरह तबाह हो चुकी है। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि हमलों के दौरान बंकर-बस्टर हथियारों की सीमित संख्या के कारण कई भूमिगत ठिकानों के केवल प्रवेश द्वार बंद किए गए थे, जिससे ईरान का मुख्य ढांचा बच गया। हथियारों की कमी और वैश्विक चिंता युद्ध के दौरान अमेरिका ने 1100 क्रूज मिसाइलें और 1300 पैट्रियट इंटरसेप्टर जैसे बड़े स्टॉक का इस्तेमाल किया, जिसे दोबारा भरने में सालों लग सकते हैं। इस स्थिति ने अमेरिकी सहयोगियों, विशेषकर यूरोपीय देशों को चिंतित कर दिया है। उन्हें डर है कि भविष्य में संघर्ष होने पर अमेरिका अपने हथियारों का स्टॉक बचाने के लिए अन्य देशों को दी जाने वाली सैन्य सहायता रोक सकता है। वीरेंद्र/ईएमएस 14 मई 2026