दमोह (ईएमएस) । जिले में शासन द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया था जिसमें दमोह जिले के प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार दमोह विधायक जयत मलैया मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी एव संसद राहुल सिंह लोधी के साथ अन्य विधायक और नेता के साथ जिले के सभी अधिकार मोजुद थे हमरे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवाहन पर इंधन बचाने को लेकर सवाल पूछने पर प्रभावी मंत्री इंदर सिंह परमार इस बात पर भड़क गए और उन्होंने पत्रकार अरुण मिश्रा को धक्का दे दिया जिससे कि पत्रकार अरुण मिश्रा बहुत ज्यादा आहत हैं ज्ञात हो कि दमोह में पूर्व में भी एक विधायक और एक मंत्री पर पत्रकारों पर हमला कराने के आरोप लग चुके हैं ऐसे में सबाल यह बनता है कि यदि जनसंपर्क विभाग के द्वारा किसी मंत्री की प्रेस वार्ता में पत्रकारों को बुलाया जाता है तो पत्रकार वहां पर सवाल नहीं पूछ सकता केवल वही सवाल पूछे जाएंगे जो की मंत्री जी आपसे कहेंगे अगर आप जनहित से जोड़ा कोई सवाल पूछते हो तो आप मंत्री जी की नजर में एवं अधिकारियों की नजर में अपराधी बन जाते हैं क्या यह तालिबानी शासन है ऐसे में तो देश में पत्रकारिता को बेन कर देना चाहिए घटना के बाद अनेक पत्रकारों में आक्रोश व्याप्त है की क्या हम निष्पक्ष पत्रकारिता नहीं कर पाएंगे इस मामले पर जिले के किसी भी जनप्रतिनिधि ने कोई संज्ञान नहीं लिया और ना ही कोई बीच बचाव किया सर्किट हाउस दमोह में मंत्री जी के काफिले में शामिल लगभग 50 गाड़ियां मौजूद थी जबकि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा कहा गया है की कम से कम वाहनों का उपयोग करें ताकि ईंधन की बचत की जा सके और देश में अमेरिका इराक युद्ध के चलते हालात खराब ना हो लेकिन दमोह जिले की प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार इस बात को बिल्कुल भी नहीं मानते कहने के लिए वह राज्य रानी ट्रेन से दमोह आते हैं की जनता में यह संदेश दिया जाए कि हमारे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा जो देशवासियों से अपील की गई है उसका पालन किया जा रहा है लेकिन यहां पर मंत्री जी के आने पर अनेक जनप्रतिनिधि सत्ताधारी पार्टी के अपनी अपनी गाड़ियों का काफिला लेकर चल रहे थे जिस पर की और पत्रकारों के द्वारा भी सवाल किया गया लेकिन मंत्री इंदर सिंह परमार के द्वारा सही जवाब नहीं दिया गया हमारे द्वारा एक सवाल किया गया की अनेक विभागों में कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पाता उस पर प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार का कहना था की आपको जानकारी नहीं है कर्मचारी का वेतन अधिकतम चार या पांच दिन विलंब हो सकता है इससे ज्यादा नहीं जबकि ग्राम पंचायत जनपद पंचायत जिला पंचायत स्वास्थ्य विभाग नगर पालिका परिषद और भी ऐसे अनेक विभाग हैं यहां पर कर्मचारियों को महीनो से वेतन नहीं मिला है ऐसे में सवाल यह उठता है की लाडली बहनों को मध्य प्रदेश शासन के द्वारा समय पर राशि दी जा रही है लेकिन दिन और रात काम करने वाले कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा उल्टा पत्रकारों के साथ धक्का मुक्की की जा रही है ऐसे में क्या मध्य प्रदेश शासन के मुख्यमंत्री मोहन यादव मामले को संज्ञान में लेकर प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार पर कोई कार्यवाही करेंगे या फिर पीड़ित पत्रकार अरुण मिश्रा को ही उल्टा आरोपी बना दिया जाएगा पत्रकार अरुण मिश्रा के साथ हुई घटना की अनेक पत्रकार साथी निंदा करते नजर आए और उनका कहना था कि यदि अपमानित करने के लिए प्रेस वार्ता का आयोजन किया जाता है तो आगे से हम ऐसी प्रेस वार्ता का बहिष्कार करेंगे अब देखना होगा कि खबर प्रशासन के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव घटना को संज्ञान में लेकर कब और क्या कार्यवाही करते हैं या फिर ऐसे ही लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की आवाज को हमेशा दबाया जाता रहेगा यह एक खबर प्रशासन के बाद देखने वाली बात होगी। ईएमएस/14मई2026