सरकार को पत्र भेजकर स्पष्ट सेवा नियमावली बनाने, पद सृजन और वर्षवार भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग देहरादून (ईएमएस)। मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष आशीष चंद्र खाली ने कहा है कि उत्तराखंड में मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट (एमएलटी) युवाओं की उपेक्षा को लेकर नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। उन्होंने सरकार को पत्र भेजकर स्पष्ट सेवा नियमावली बनाने, पद सृजन और वर्षवार भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग उठाई है। यहां परेड ग्राउंड स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य गठन के 26 वर्ष के बावजूद आज तक लैब तकनीशियनों के लिए कोई ठोस नीति लागू नहीं हो सकी है, जिससे सैकड़ों प्रशिक्षित युवा बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लंबे समय से भी बी एससी मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी कोर्स संचालित हो रहा है और हर साल बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पास हो रहे हैं, लेकिन सरकारी स्तर पर रोजगार के अवसर न के बराबर हैं। खाती ने कहा है कि पंजीकरण होने के बावजूद अभ्यर्थियों को नौकरी नहीं मिल पा रही, जिससे उनमें निराशा और आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में आईपीएचएस 2012 मानकों के अनुरूप पदों के सृजन और सेवा नियमावली का प्रस्ताव तैयार किया गया था, लेकिन शासन स्तर पर बार-बार आपत्तियां लगाकर उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। वहीं दूसरी ओर, सरकार द्वारा कई सरकारी लैब्स को निजी कंपनियों के माध्यम से संचालित किए जाने से स्थायी रोजगार के अवसर खत्म हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि निजी लैब्स की जांच रिपोर्टों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठते रहे हैं, जिससे आम जनता का भरोसा प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पर्वतीय और दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में लैब तकनीशियनों की भारी कमी है। खाली ने कहा है कि ऐसी स्थिति में लोगों को छोटी-छोटी जांचों के लिए भी दूर जाना पड़ता है, जिससे समय और धन की बर्बादी के साथ स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ता है। इस अवसर पर एसोसिएशन के अनेक पदाधिकारी शामिल रहे। शैलेन्द्र नेगी/ईएमएस/14 मई 2026