अप्रैल मई-26( डॉ शिव गोपाल मिश्रा श्रद्धांजलि अंक) विज्ञान परिषद् की स्थापना सन् 1913 ई. में हुई थी और इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य भारत में वैज्ञानिक विचारधारा का प्रचार प्रसार था। और इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य भारत में वैज्ञानिक विचारधारा का प्रचार प्रसार था। इस दिशा में 1913 से अनवरत कार्य करने वाली इस संस्था से विज्ञान नाम की मासिक पत्रिका का प्रकाशन भी किया जाता है। जनवरी 1915 से प्रकाशन का सुझाव था। 30 जनवरी 1915 की बैठक में विज्ञान के प्रकाशन का काम मिस्टर भल्ला को दिया गया था और सम्पादन का कार्य परिषद ने स्वयं अपने हाथ में रखा था। इसका मुद्रण लीडर प्रेस से हुई थी । आज यह संस्थान सोद्देश्यपूर्ण विज्ञान तथा गणित शिक्षा के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करता है। विज्ञान परिषद् प्रयाग हम विज्ञान लेखकों का गुरुकुल रहा है। हिंदी विज्ञान लेखन को बढ़ावा देकर परिषद् ने विगत एक शताब्दी से भी अधिक समय से समाज में वैज्ञानिक चेतना जगाने का अभूतपूर्व और अनुकरणीय काम किया यह पत्रिका सर्वप्रथम अप्रैल 1915 में प्रकाशित हुई थी और तब से आज तक अनवरत प्रकाशित रहने का इसका रेकॉर्ड रहा है। प्रो. शिवगोपाल मिश्र का जन्म 13 सितम्बर 1931 को उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले की खागा तहसील के नरौली नामक गांव में हुआ था। आपके पिता बद्री विशाल मिश्र और माता पार्वती देवी थीं। छः भाइयों में आप पांचवें भाई थे। आरंभिक शिक्षा गांव तथा किशुनपुर में प्राप्त कर प्रो. शिवगोपाल मिश्र फतेहपुर से हाई स्कूल की परीक्षा 1946 में पास की और उच्च शिक्षा के लिये अपने बड़े भाई के साथ प्रयागराज आ गये। प्रो. शिवगोपाल मिश्र के. पी. इण्टर कॉलेज से 1948 में इण्टर तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से 1950 में बी.एससी. और 1952 में मृदा विज्ञान में एम.एससी. की उपाधियां प्रथम श्रेणी में प्राप्त की। 1955 में प्रो. शिवगोपाल मिश्र फॉर्मेशन ऑफ एसिडिक एण्ड एलकली सॉयल्स (formation of Acidic and Alkali Soils ) विषय पर अपना शोधकार्य पूर्ण किया और डी फिल की उपाधि प्राप्त की। प्रो. शिवगोपाल मिश्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग से साहित्य रत्न की उपाधि भी प्राप्त की। 1956 में आप इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रसायन विभाग में प्रवक्ता नियुक्त हुए और क्रमशः रीडर, प्रोफेसर तथा शीलाधर मृदा विज्ञान शोध संस्थान के निदेशक का दायित्व संभालते हुए 1992 में 36 वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए। आपकी गणना देश के श्रेष्ठ मृदाविज्ञानियों में की जाती है। अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में आपके दो सौ से अधिक मृदा विज्ञान संबंधी शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। आपके कुशल निर्देशन में 42 शिष्यों ने डी.फिल तथा 3 शिष्यों ने डी.एससी. की उपाधियां प्राप्त की हैं और वे देश-विदेश में उच्च पदों पर कार्यरत हैं। आप नेशनल एकेडेमी ऑफ साइंस, इंडिया के फैलो भी हैं। प्रो. शिवगोपाल मिश्र सी.एस.आई.आर., नई दिल्ली के प्रकाशन एवं सूचना निदेशालय (अब राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं सूचना स्रोत संस्थान) में वर्ष 1971-72 के दौरान विशेष कार्य अधिकारी ओ.एस.डी. के रूप में कार्य किया। वहां प्रो. शिवगोपाल मिश्र द ‘वेल्थ ऑफ इण्डिया’ नामक वैज्ञानिक विश्वकोश के हिन्दी अनुवाद, संपादन एवं संयोजन का कार्य अत्यंत कुशलतापूर्वक किया जिसके फलस्वरूप भारत की सम्पदा - प्राकृतिक पदार्थ के प्रथम खण्ड का प्रकाशन हुआ जिसका लोकार्पण तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने किया। जब आप बी.एससी. के छात्र थे तभी से आपके विज्ञान लेख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगे थे। 1956 में आप विज्ञान परिषद से जुड़े और विज्ञान पत्रिका के संपादक मंडल के सदस्य बने। 1958 में जब विज्ञान परिषद् प्रयाग द्वारा देश की प्रथम हिन्दी शोध पत्रिका विज्ञान परिषद् अनुसंधान पत्रिका का प्रकाशन आरम्भ किया गया तो उसके संपादक डा० सत्यप्रकाश जी ने डा० शिवगोपाल मिश्र को इस पत्रिका का प्रबंध संपादक नियुक्त किया। तब से लेकर आज तक लगभग ६५ वर्षों से आप इस दायित्व का अत्यंत कुशलता एवं निष्ठा के साथ निर्वहन कर रहे हैं। 1959 में आप विज्ञान पत्रिका के संपादक बनाए गये और प्रो. शिवगोपाल मिश्र 1971 तक, बारह वर्षों तक इसका संपादन किया। 1977 में प्रो. शिवगोपाल मिश्र विज्ञान परिषद् के प्रधानमंत्री का पद संभाला और 1987 तक प्रो. शिवगोपाल मिश्र विज्ञान परिषद् की गतिविधियों का संचालन किया। 1996 में आप एक बार पुनः विज्ञान परिषद् के प्रधानमंत्री बनाए गये और पिछले वर्षों में आपके नेतृत्व में विज्ञान परिषद् ने अनेक उपलब्धियां प्राप्त की हैं। वर्ष 2000 से आप विज्ञान पत्रिका के संपादन का कार्य भी निरंतर संभाले हुए हैं। हिन्दी में वैज्ञानिक संचार एवं साहित्य सृजन शिवगोपाल मिश्र ने अनेक पाठ्यपुस्तकें हिन्दी और अंग्रेजी में लिखी हैं। इसके अतिरिक्त प्रो. शिवगोपाल मिश्र लोकप्रिय विज्ञान तथा बाल विज्ञान संबंधी बहुत-सी पुस्तकें भी लिखी हैं। इन पुस्तकों की संख्या सौ से अधिक है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में डा. मिश्र के एक हजार से अधिक लेख वैज्ञानिक विषयों पर प्रकाशित हो चुके हैं। इन पत्रिकाओं में प्रमुख हैं : विज्ञान, विज्ञान प्रगति, आविष्कार, आंचलिक पत्रकार, वैज्ञानिक, विज्ञान आपके लिये, हिन्दुस्तानी, धर्मयुग, साप्ताहिक हिन्दुस्तान, विज्ञान लोक, ज्ञानोदय, विज्ञान जगत, खेती, विज्ञान भारती, विज्ञान गरिमा सिंधु, क्षितिज, जिज्ञासा, विकल्प आदि। इनमें से कुछ लेख विज्ञान प्रवाह नामक पुस्तक में संकलित हैं। हिंदी में विज्ञान लेखन के प्रमुख स्तंभ डॉ. शिव गोपाल मिश्र का निधन हो गया। उनका निधन 26 मार्च को प्रयागराज में 93 साल की उम्र में हो गया, विज्ञान अप्रैल मई-26 इस हेतु परिषद ने डॉ शिव गोपाल मिश्रा श्रद्धांजलि अंक इसमें 50 लेख शामिल है । देश विदेश के उनके जीवन से शिक्षा लेकर कॉलेज के प्रोफेसरों,स्कुलों के शिक्षकों अध्यापकों व संस्थानों के वैज्ञानिकों, विज्ञान लेखकों ने लेख लिखकर श्रद्धांजलि अर्पित की है। (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) .../ 15 मई /2026