इन्दौर (ईएमएस) मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित भोजशाला परिसर को आधिकारिक तौर पर देवी सरस्वती (मां वाग्देवी) का मंदिर माना है। कोर्ट ने अपने इस फैसले का मुख्य आधार सुप्रीम कोर्ट के 2019 के अयोध्या राम जन्मभूमि मामले के कानूनी सिद्धांतों को बनाया है। इसके साथ ही, परिसर में मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने की अनुमति देने वाले पुराने आदेश को पूरी तरह से रद्द (खारिज) कर दिया है। [1, 2, 3, 4] मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ द्वारा दिए गए इस निर्णय के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं - • मंदिर के रूप में मान्यता: कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की 2100 पन्नों की वैज्ञानिक और पुरातात्विक सर्वे रिपोर्ट तथा ऐतिहासिक दस्तावेजों को देखते हुए यह माना कि यह ढांचा मूल रूप से परमार वंश के राजा भोज द्वारा निर्मित एक संस्कृत अध्ययन केंद्र और वाग्देवी का मंदिर था। • पूजा का विशेष अधिकार: हिंदू पक्ष को अब पूरे परिसर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान करने का कानूनी अधिकार मिल गया है। • नमाज की अनुमति खारिज: साल 2003 में एएसआई (ASI) द्वारा बनाई गई उस व्यवस्था को कोर्ट ने खत्म कर दिया है, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार को परिसर में जुम्मे की नमाज अदा करने की छूट दी गई थी। • वैकल्पिक भूमि का सुझाव: अदालत ने राज्य सरकार को सुझाव दिया है कि मुस्लिम पक्ष को नमाज या मस्जिद के निर्माण के लिए धार जिले के भीतर ही किसी अन्य स्थान पर वैकल्पिक भूमि (जमीन) उपलब्ध कराई जा सकती है। • - (यह खबर अभी अपडेट की जा रही है) आनंद पुरोहित/ 15 मई 2026