अंतर्राष्ट्रीय
15-May-2026


बीजिंग,(ईएमएस)। बीजिंग द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो चीन में कैसे प्रवेश कर सके? दरअसल, यह चीन द्वारा अपनाई भाषाई तरकीब और राजनयिक प्रोटोकॉल की बदौलत संभव हुआ। अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो पर चीन ने सीनेटर रहते हुए दो बार प्रतिबंध लगाए थे। बीजिंग द्वारा रुबियो के नाम के लिप्यंतरण में बदलाव करने के बाद रुबियो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की चीन की पहली यात्रा पर उनके साथ गए। रिपोर्ट बताया गया कि चीन ने यह चालाकी से किया है। इस यात्रा के आधिकारिक दस्तावेजों में उनके नाम की वर्तनी अलग है। ऐसा प्रतीत होता है कि चीनी सरकार ने विदेश मंत्री को प्रवेश देने के लिए एक कूटनीतिक युक्ति का इस्तेमाल किया, जिसमें उनके उपनाम के पहले अक्षर को लू के लिए अलग चीनी अक्षर से लिप्यंतरित किया गया। नाम को मार्को लू में बदलने से बीजिंग प्रतिबंध हटने से रुबियो का स्वागत करने में सक्षम हो गया, जो भविष्य में लागू किए जा सकते हैं। जनवरी 2025 में विदेश मंत्री के रूप में रूबियो के पदभार संभालने से कुछ समय पहले ही चीनी सरकार और मीडिया ने उनके उपनाम का लिप्यंतरण एक अलग चीनी अक्षर से करना शुरू किया था। मार्च में चीनी विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया कि यदि रूबियो बीजिंग में होने वाले शिखर सम्मेलन के लिए ट्रंप के साथ यात्रा करते हैं, तब वह उन पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने को तैयार है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने 16 मार्च को कहा कि चीन के प्रतिबंध अमेरिकी सीनेट में अपने कार्यकाल के दौरान चीन के संबंध में श्री रूबियो के शब्दों और कार्यों पर लक्षित थे। आशीष दुबे / 15 मई 2026