राज्य
15-May-2026
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- किसानों के समर्थन में निकाले गए मोर्चे में कांग्रेस ने भाग लिया, लेकिन सरकार ने आंदोलन पर दमनकारी कार्रवाई की “सरेंडर मोदी सरकार” की वजह से ही देश की जनता महंगाई की मार झेल रही, केंद्र सरकार के पास कोई स्पष्ट ईंधन नीति नहीं - भ्रष्ट हो चुकी है नीट परीक्षा व्यवस्था, 7 वर्षों में 71 बार लीक हुए हैं नीट पेपर - मोदी सरकार विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं मुंबई, (ईएमएस)। कोकण के आम और काजू उत्पादक किसान भारी संकट में हैं। पिछले तीन महीनों से किसान ठोस मदद की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। शुक्रवार को मुंबई में मुख्यमंत्री के सरकारी निवास ‘वर्षा’ बंगले तक किसानों का मोर्चा निकाला जा रहा था, लेकिन पुलिस की मदद से किसान विरोधी भाजपा सरकार ने मोर्चे को रोकने की कोशिश की। हालांकि सरकार की इस दमनकारी कार्रवाई से हम डरने वाले नहीं हैं। जब तक कोकण के किसानों को पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिलती, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा, ऐसा चेतावनी भरा बयान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने दिया। कोकण के आम और काजू उत्पादक किसानों को सहायता देने की मांग को लेकर गिरगांव चौपाटी से वर्षा बंगले तक मोर्चा निकाला जाना था। इससे पहले ही स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद राजू शेट्टी, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, राष्ट्रीय समाज पक्ष के नेता महादेव जानकर शिवसेना नेता विनायक राऊत, सांसद अरविंद सावंत, मराठी भाषा समिति के दीपक पवार, प्रकाश रेड्डी सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं को पुलिस ने मंत्रालय परिसर स्थित शिवसेना कार्यालय ‘शिवालय’ से हिरासत में ले लिया। कुछ लोगों को डोंगरी पुलिस स्टेशन और कुछ को आज़ाद मैदान ले जाया गया। इस दौरान हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने पहले ही किसान संगठनों के आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा कर दी थी। भाजपा महायुति सरकार को किसानों की मांगों पर ध्यान देने के लिए चेतावनी दी गई थी कि 15 मई को मोर्चा निकाला जाएगा, लेकिन सरकार ने इसे नजरअंदाज किया। इसलिए कोकण के किसानों के समर्थन में आज यह मोर्चा आयोजित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसान, मजदूर और विपक्ष की आवाज दबाने के लिए आंदोलनों और मोर्चों को अनुमति नहीं देती। किसानों का यह मोर्चा लोकतांत्रिक तरीके से निकाला जा रहा था, लेकिन सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचल रही है। उन्होंने कहा, “जब-जब सरकार डरती है, पुलिस को आगे करती है।” उन्होंने मांग की कि आम उत्पादक किसानों को प्रति हेक्टेयर 5 लाख रुपये और काजू उत्पादक किसानों को प्रति हेक्टेयर 3 लाख रुपये की सहायता दी जाए। जब तक ये मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक किसान संघर्ष जारी रखेंगे। * “सरेंडर मोदी सरकार” और ईंधन मूल्य वृद्धि हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि मोदी सरकार ने पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतें बढ़ाकर पहले से महंगाई से परेशान जनता पर और बोझ डाल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पांच राज्यों के चुनावों में भाजपा को नुकसान न हो, इसलिए ईंधन कीमतों को कुछ समय तक रोका गया था और आने वाले समय में कीमतें और बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार पूरी तरह अमेरिका के दबाव में काम कर रही है। भारत वर्षों से अपने मित्र राष्ट्र रूस से रुपये में तेल खरीदता था, लेकिन अमेरिका के दबाव के कारण रूस से तेल खरीदने की नीति कमजोर कर दी गई। यदि पहले की तरह रूस से तेल लिया जाता, तो आज देश को यह स्थिति नहीं झेलनी पड़ती। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। * नीट परीक्षा व्यवस्था भी भ्रष्ट नीट पेपर लीक मामले पर बोलते हुए हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि पिछले सात वर्षों में 71 बार नीट पेपर लीक हुए हैं। लाखों विद्यार्थी कठिन मेहनत करते हैं और उनके माता-पिता अपने बच्चों को डॉक्टर बनते देखने का सपना देखते हैं, लेकिन पूरी व्यवस्था भ्रष्ट हो चुकी है। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार बेहद गंभीर विषय है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे की अनदेखी कर रहे हैं। * प्रधानमंत्री की सुरक्षा पर भी भाजपा की राजनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सादगी अपनाने और अपनी सुरक्षा कम करने के मुद्दे पर हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश ने अपने दो प्रधानमंत्रियों को खोया है। लेकिन भाजपा सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर भी राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि उनके पास खुद कोई गाड़ियों का काफिला नहीं है। वे कई बार पदयात्रा करते हैं और आम जनता की तरह सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा विपक्ष को “बिन दिमाग” कहे जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि फडणवीस को लगता है कि सारी बुद्धिमत्ता सिर्फ उनके, भाजपा और आरएसएस के पास ही है, इसलिए वे बाकी सभी लोगों का अपमान करते हैं। उन्होंने कहा कि यह अहंकार वर्षों से उनकी राजनीतिक प्रवृत्ति का हिस्सा रहा है। संतोष झा- १५ मई/२०२६/ईएमएस