:: सीलिंग के पेंच में उलझा विकास, अवैध निर्माण और अतिक्रमणों से उपजा आक्रोश; X पर सरकार को भेजा ज्ञापन :: इंदौर (ईएमएस)। देश के सबसे स्वच्छ शहर का गौरव प्राप्त करने वाले इंदौर की प्रमुख रहवासी बस्ती तुलसी नगर आज अव्यवस्थित विकास और मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। वर्ष 2014 में नगर निगम सीमा में शामिल होने के एक दशक बाद भी कॉलोनी की समस्याएं कम होने के बजाय और जटिल हो गई हैं। शासन-प्रशासन की उपेक्षा से क्षुब्ध रहवासियों ने अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) के माध्यम से कलेक्टर, महापौर और विभागीय मंत्री को ज्ञापन भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ज्ञापन में प्रमुखता से उठाया गया मुद्दा अर्बन लैंड सीलिंग एक्ट का है। रहवासियों का कहना है कि वर्ष 2000 में इस एक्ट के समाप्त होने के बावजूद तुलसी नगर के अधिकांश भूखंडों को अब तक विधिवत मुक्त नहीं किया गया है। इसका खामियाजा वैध नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है क्योंकि नक्शे स्वीकृत नहीं हो रहे हैं। दूसरी ओर, प्रशासनिक ढील का फायदा उठाकर भू-माफिया और रसूखदार लोग कॉलोनी में बेखौफ होकर अवैध निर्माण कर रहे हैं। :: अवैध निर्माणों से बिगड़ी शहर की सूरत :: क्षेत्र के नागरिकों का आरोप है कि 1500 वर्गफीट के प्लॉटों को नियमों के विरुद्ध विभाजित कर बहुमंजिला इमारतें खड़ी की जा रही हैं। सड़कों पर अतिक्रमण कर बनाए गए रैंप और छज्जों ने कॉलोनी के रास्तों को संकरा कर दिया है। पार्किंग की उचित व्यवस्था न होने से सड़कें स्थायी स्टैंड में तब्दील हो गई हैं, जिससे आवागमन बाधित हो रहा है। साथ ही, रिहायशी इलाकों में बिना अनुमति के संचालित हो रहे होटल, हॉस्टल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों ने कॉलोनी की शांति और सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। :: बुनियादी ढांचा हुआ ध्वस्त :: बढ़ती आबादी के दबाव के आगे कॉलोनी की पुरानी ड्रेनेज लाइन पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। सड़कों की हालत यह है कि वे आज भी कच्ची और धूल भरी हैं, जो बारिश के दिनों में कीचड़ और जलभराव का केंद्र बन जाती हैं। रहवासियों ने तीखा सवाल किया है कि इंदौर के स्वच्छता दावों के बीच तुलसी नगर जैसी बड़ी और पुरानी कॉलोनी को आखिर क्यों मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया है। उन्होंने मांग की है कि भूखंडों को तत्काल सीलिंग मुक्त कर कॉलोनी के समग्र विकास के लिए विशेष कार्ययोजना लागू की जाए। प्रकाश/15 मई 2026