राष्ट्रीय
15-May-2026


:: न्याय की चौखट से स्पष्ट हुआ धार का इतिहास : इंदौर हाईकोर्ट ने 21 साल पुराना साझा पूजा का आदेश पलटा, मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए अलग भूमि देने का सुझाव :: इंदौर/धार (ईएमएस)। धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर सदियों से चले आ रहे विवाद पर शुक्रवार को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने एक ऐसा युगप्रवर्तक निर्णय सुनाया है, जिसने मालवा के इतिहास को नई स्पष्टता प्रदान कर दी है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से उद्घोषित किया कि धार स्थित भोजशाला परिसर का धार्मिक स्वरूप मूलतः देवी सरस्वती के मंदिर के रूप में स्थापित है। इस निर्णय के साथ ही माननीय न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा 7 अप्रैल 2003 को जारी उस आदेश को भी तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है, जिसके तहत परिसर में प्रत्येक शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी। :: एएसआई की वैज्ञानिक रिपोर्ट बनी आधार :: न्यायालय का यह ऐतिहासिक फैसला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा वर्ष 2024 में किए गए 98 दिवसीय वैज्ञानिक सर्वे की दो हजार पन्नों की रिपोर्ट पर आधारित है। एएसआई की इस रिपोर्ट में वैज्ञानिक रूप से यह सिद्ध किया गया था कि वर्तमान विवादित ढांचे का निर्माण पूर्ववर्ती मंदिर के स्तंभों और मलबे को पुन: संयोजित कर किया गया है। सर्वेक्षण के दौरान मिले प्राचीन सिक्के, खंडित मूर्तियां और संस्कृत शिलालेख इस बात के अकाट्य प्रमाण बने कि यह परिसर परमार वंश के गौरवशाली शासनकाल का हिस्सा था। हिंदू पक्ष द्वारा दायर जनहित याचिकाओं को स्वीकार करते हुए खंडपीठ ने माना कि वर्तमान संरचना की आत्मा एक मंदिर की है, जिसे मध्यकाल में परिवर्तित करने का प्रयास किया गया था। :: मुस्लिम पक्ष के लिए भूमि का विकल्प :: अदालत ने न्याय के सिद्धांतों को संतुलित करते हुए मुस्लिम पक्ष के लिए भी एक विकल्प खुला रखा है। खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि यदि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी मस्जिद निर्माण के लिए भूमि की मांग करती है, तो राज्य सरकार जिला प्रशासन के माध्यम से वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत धार जिले में कहीं और अलग भूमि आवंटित करने पर विचार कर सकती है। :: चप्पे-चप्पे पर नजर, किले में तब्दील हुई भोजशाला :: शुक्रवार को जुमे की नमाज और फैसले के संयोग को देखते हुए प्रशासन ने धार में किलेबंदी कर दी थी। लगभग 1200 पुलिस जवान तैनात रहे और चप्पे-चप्पे पर नजर रखी गई। फैसले के बाद हिंदू पक्ष में जहाँ हर्ष की लहर है, वहीं मुस्लिम पक्ष ने असंतोष जताया है। :: सुप्रीम कोर्ट जाएगा मुस्लिम पक्ष :: फैसले के उपरांत हिंदू पक्ष में जहां हर्ष व्याप्त है, वहीं मुस्लिम पक्ष ने अपनी असहमति दर्ज कराई है। धार के शहर काजी वकार सादिक ने न्यायिक गरिमा का सम्मान करते हुए स्पष्ट किया कि वे इस आदेश का विस्तृत अध्ययन करने के उपरांत इसके विरुद्ध देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। 21 साल पुराने साझा पूजा के आदेश के समाप्त होने और भोजशाला को पूर्ण रूप से मंदिर घोषित किए जाने के इस निर्णय ने न केवल कानूनी लड़ाई को एक नया मोड़ दे दिया है, बल्कि ऐतिहासिक सत्यों को पुनर्स्थापित करने की दिशा में भी एक बड़ी लकीर खींच दी है। अब यह परिसर केवल पुरातात्विक स्मारक नहीं, बल्कि अपनी मूल धार्मिक पहचान के साथ पहचाना जाएगा। प्रकाश/15 मई 2026