अंतर्राष्ट्रीय
16-May-2026
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दुबई,(ईएमएस)। ईरान के लगातार हो रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अपने महत्वपूर्ण ऊर्जा ठिकानों को बचाने के लिए सुरक्षा के बड़े और कड़े इंतजाम शुरू कर दिए हैं। दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास स्थित तेल भंडारण टैंकों के ऊपर भारी-भरकम लोहे के जाल जैसे ढांचे लगाए जा रहे हैं, जिन्हें तकनीकी भाषा में ‘कोप केज’ कहा जाता है। यह ठीक वही फिजिकल सुरक्षा तकनीक है, जिसका इस्तेमाल रूस ने यूक्रेन युद्ध के दौरान अपने ऑयल डिपो और सैन्य टैंकों को हवाई हमलों से बचाने के लिए किया था। सोशल मीडिया पर सामने आईं तस्वीरों के अनुसार, दुबई में कई तेल टैंकों को पूरी तरह से इन लोहे के ढांचों से ढक दिया गया है, जबकि अन्य जगहों पर निर्माण कार्य तेजी से जारी है। हालांकि इन लोहे के पिंजरों का मकसद सीधे तौर पर बड़े बैलिस्टिक या क्रूज मिसाइल हमलों को रोकना नहीं है, लेकिन ये छोटे और मध्यम स्तर के आत्मघाती ड्रोन हमलों के प्रभाव को काफी हद तक कम कर देते हैं। विशेष रूप से ईरान के खतरनाक ‘शाहेद-136’ जैसे ड्रोनों से बचाव के लिए यह तकनीक बेहद कारगर मानी जा रही है, क्योंकि यह मुख्य टारगेट और विस्फोटक हथियार के बीच एक मजबूत सुरक्षा परत बना देती है। यूएई को यह कदम इसलिए उठाना पड़ा है क्योंकि ईरान के साथ चले हालिया संघर्ष में उसे भारी आर्थिक और बुनियादी नुकसान झेलना पड़ा है। रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश की एयर डिफेंस प्रणाली ने मुस्तैदी दिखाते हुए 551 बैलिस्टिक मिसाइलें, 29 क्रूज मिसाइलें और 2,265 ड्रोन मार गिराए थे। इसके बावजूद, फुजैराह पोर्ट के तेल भंडारण और हबशन गैस प्लांट जैसे देश के सबसे अहम रणनीतिक ठिकानों को नुकसान पहुंचा था। यूएई की ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य केंद्र माना जाने वाला हबशन गैस प्लांट इस हमले के कारण बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिसे अपनी पूरी क्षमता में वापस आने में अगले साल तक का समय लग सकता है। संघर्षविराम लागू होने के बाद भी यह खतरा पूरी तरह टला नहीं है, क्योंकि हाल ही में 10 मई को भी ईरान की ओर से हमला किया गया था। यही वजह है कि अब दुनिया भर में आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम के साथ-साथ तेल डिपो जैसे संवेदनशील इंफ्रास्ट्रक्चर को बचाने के लिए जाल, केबल और मेटल कवरिंग जैसे भौतिक सुरक्षा उपायों पर जोर दिया जा रहा है। वीरेंद्र/ईएमएस 16 मई 2026