- मामला जगनपुर जमीन का जिलदबंदोवस्त में शासकीय सर्वे नंबरों पर तातकालीन कलेक्टर ने संभ्रांत कालोनाईजरो को नहीं दी थी बिक्रय अनुमति मौके पर बन गई अवैध कालोनी नहीं हो रही है उसकी जांच गुना (ईएमएस) विकसित गुना क्षेत्र में बेस कीमती हुई भूमि हथियाने के प्रयास में सफल हुए शहर के कुछ संभ्रांत नागरिक के विरुद्ध प्रशासन कार्रवाई करने में असहाय हो रहा है जिले के प्रमुख राजनीतिक दल और उनके मुखिया सहित क्षेत्र के विधायक और सांसद भी सब कुछ जानते हुए या तो गुमराह हो रहे हैं या फिर वह इन संभ्रांत नागरिकों के विरुद्ध कार्रवाई कराने में अक्षम सिद्ध हो रहे हैं यह ज्ञात हो कि ग्राम जगनपुर तहसील गुना स्थित भूमि सर्वे क्रमांक 68/ 3 मिन 1 रकवा 0.627 हेक्टर तथा भूमि सर्वे नंबर 45/3 रखवा 1.045 हेक्टर तथा सर्वे नंबर 45/ 4 मिन- 5 रखवा 0.836 हेक्टर, सर्वे नंबर 68 /3 मिन- 2 रकवा 0.732 हेक्टर ,सर्वे क्रमांक 68/ 3 मिन-3 रकवा 0.731 हैक्टर सर्वे क्रमांक 45 / 4 रकबा 0.209हैकटर पटटा भूमि को बिना वैध अनुमति प्राप्त किया पटटेदार ने भूमि विक्रय कर दी थी जिन-जिन क्रेताओं ने बिना अनुमति प्राप्त क्रय की गई भूमि अन्य को विक्रय की उसकी बदस्तूर विक्रय पंजीयन विभाग में होता रहा और तहसील में भूमि स्वामी के रूप में नाम दर्ज होते रहे! इस बेस कीमती जमीन को खुर्द- बुरद करने में पंजीयन विभाग और तहसील के जिम्मेदार अधिकारी समय-समय पर सहयोग करते रहे इनमें किसी ने भी भूमि अंतरण योग्य है या नहीं इस और अपने पथ कर्तव्य का निर्वाहन न कर अधिकारों का दुरुपयोग किया! नगर के संभ्रांत नागरिक अतुल जग्गी और अखिलेश जैन पुत्र सुखचंद जैन जो कि शहर की वेश कीमती जमीनों की खरीद परोखत करते रहते हैं के द्वारा उपरोक्त मानक भूमियों को क्रय किया गया और न्यायालय कलेक्टर के समक्ष उक्त भूमि विक्रय किए जाने की अनुमति प्राथिक की गई! उस समय स्वच्छ छवि के तातकालीन कलेक्टर जो गुना में पदस्थ थे! न्यायालय कलेक्टर गुना के समक्ष इन नागरिकों का भी भूमि विक्रय अनुमति प्रकरण क्रमांक 01 /अ-21/18-19 प्रचलन में रहा यहां हम यह स्पष्ट कर देते हैं कि पटटा भूमि या विक्रय वर्जित भूमि के संबंध में भूमि विक्रय अनुमति लेने का अधिकार या तो मूल पटटेदार या विक्रय वर्जित भूमि के मूल- स्वामी को रहता हैजबकि यह सभ्रांत नागरिक अखिलेश जैन और अतुल जगगी नातो मूल पटटेदार थे और ना ही विक्रय वर्जित भूमि के स्वामी ही थे इन संभ्रांत नागरिकों के प्रकरण पर जब तत्कालीन कलेक्टर ने भू-राजस्व अभिलेख खंगाला तो पाया कि उपरोक्त मानक भूमिया जिल्द- बंदोबस्त में शासकीय दर्ज हैं ! इसलिए मध्य प्रदेश भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 163 में उल्लिखित प्रावधानों का उल्लंघन पाते हुए इन संभ्रांत नागरिकों के भूमि विक्रय अनुमति आवेदन निरस्त कर दिए थे! मध्य प्रदेश भू राजस्व संहिता पटटेदार या विक्रय- वर्जित के स्वामी को ही भूमि विक्रय अनुमति लेने का अधिकार देती है नाकि बिना अनुमति प्राप्त भूमि के खरीददारों को विक्रय अनुमति आवेदन प्रस्तुत करने का अधिकार देती है यहां यह भी उल्लेख है कि भू राजस्व संहिता के तहत अनुमति देने या ना देने का अधिकार मात्र उस क्षेत्र के जिला कलेक्टर को ही रहता है उपरोक्त सभी सर्वे नं 45,ओर सरवे नं 68 तहसीलदार अनुसार 99 बीगा जिलदबंदोवस्त में (पहाड़) शासकीय है - सीताराम नाटानी गुना