नई दिल्ली,(ईएमएस)। नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के बाद उपजे विवाद ने अब छात्रों के साथ-साथ डॉक्टरों को भी आंदोलित किया है। डॉक्टरों के एक प्रमुख संगठन, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (यूडीएफ) ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को तत्काल भंग करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यूडीएफ ने अपनी याचिका संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की है, जिसमें हालिया नीट-यूजी के आयोजन में प्रणालीगत और विनाशकारी विफलता का आरोप लगाया गया है। संगठन ने एनटीए के मौजूदा स्वरूप पर सवाल उठाकर परीक्षा प्रणाली में व्यापक संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया है। उनकी मांग है कि एजेंसी को तत्काल भंग कर दिया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। गौरतलब है कि इस साल के नीट पेपर लीक मामले के सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने पूरे पेपर को रद्द किया था। अब छात्रों को फिर से परीक्षा देनी होगी, जिसके लिए 21 जून की तारीख तय की गई है। इस बार परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों को अतिरिक्त 15 मिनट का समय दिया जाएगा, ताकि उन्हें तनावपूर्ण माहौल में कुछ राहत मिल सके। इस बीच, पेपर लीक की गहन जांच जारी है। पुलिस ने महाराष्ट्र के लातूर में कई कोचिंग संस्थानों के कर्मियों, छात्रों और काउंसलरों से पूछताछ की है और सीसीटीवी फुटेज भी जब्त की है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भी महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से तीन व्यक्तियों नासिक से शुभम खैरनार, पुणे से मनीषा वाघमारे और अहिल्यानगर के राहुरी से धनंजय लोखंडे को हिरासत में लिया है। जांच एजेंसियां इस मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं, जबकि डॉक्टरों का संगठन व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग कर रहा है। आशीष दुबे / 16 मई 2026