क्षेत्रीय
16-May-2026


रायसेन (ईएमएस)। सरकारी योजनाओं को लेकर युवाओं की समझ सिर्फ किताबों तक सीमित न रहे।बल्कि वे जमीनी व्यवस्थाओं को भी करीब से जान सकें।इसी उद्देश्य से आयोजित अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम में युवाओं ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की पूरी प्रक्रिया को समझा। भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा संचालित माय भारत केंद्र रायसेन के तत्वावधान में चल रहे 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के चौथे दिन युवा स्वयंसेवकों ने शासकीय उचित मूल्य दुकानों का भ्रमण कर यह जाना कि सरकारी गोदामों से निकलने वाला अनाज किस तरह गरीब परिवारों की थाली तक पहुंचता है। ला खाद्य आपूर्ति विभाग के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण में स्वयंसेवकों को पठारी और नकतरा स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकानों पर ले जाया गया। यहां युवाओं ने राशन वितरण व्यवस्था को नजदीक से देखा और खाद्यान्न वितरण की तकनीकी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं की जानकारी हासिल की। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली केवल अनाज बांटने तक सीमित नहीं है। बल्कि इसमें स्टॉक प्रबंधन, पारदर्शिता, डिजिटल निगरानी और उपभोक्ता सत्यापन जैसी कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। युवाओं को सबसे पहले यह समझाया गया कि सरकारी गोदामों से उचित मूल्य दुकानों तक खाद्यान्न का आवंटन किस प्रकार किया जाता है। अधिकारियों ने रिलीज ऑर्डर (आरओ) जारी करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि बिना आरओ के किसी भी दुकान को अनाज नहीं दिया जाता। यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और रिकॉर्ड आधारित होती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है। इसके बाद स्वयंसेवकों को सरकारी खरीद व्यवस्था और स्टॉक रजिस्टर के रखरखाव की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि किस प्रकार हर गेहूं, चावल बोरी का हिसाब रखा जाता है और वितरण से पहले स्टॉक का सत्यापन किया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान पीओएस मशीन की कार्यप्रणाली का भी लाइव प्रदर्शन किया गया। स्वयंसेवकों ने देखा कि किस तरह हितग्राहियों का बायोमेट्रिक सत्यापन कर राशन वितरित किया जाता है।ताकि पात्र व्यक्ति को ही खाद्यान्न मिल सके और फर्जीवाड़े पर रोक लगाई जा सके। प्रशिक्षण में युवाओं को वर्तमान वितरण मानकों की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि पात्र हितग्राहियों को प्रति यूनिट 1 किलो चावल और 4 किलो गेहूं वितरित किया जाता है। स्वयंसेवकों ने मौके पर हितग्राहियों को राशन प्राप्त करते हुए देखा और वितरण प्रक्रिया को समझा। पीडीएस प्रबंधक ने बताया कि पहले की तुलना में अब पूरी प्रणाली अधिक डिजिटल और पारदर्शी हो चुकी है। ऑनलाइन रिकॉर्ड, बायोमेट्रिक सत्यापन और पीओएस मशीनों के उपयोग से गड़बड़ियों की संभावना कम हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र व्यक्ति राशन से वंचित न रहे। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने उपभोक्ताओं से चर्चा कर उनकी समस्याएं और सुझाव भी जाने। कई हितग्राहियों ने समय पर राशन मिलने की बात कही, वहीं कुछ लोगों ने नेटवर्क और मशीन संबंधी तकनीकी दिक्कतों का जिक्र किया। स्वयंसेवकों ने इसे प्रशासनिक व्यवस्था को समझने का महत्वपूर्ण अनुभव बताया।माय भारत केंद्र के अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के अनुभवात्मक कार्यक्रम युवाओं को शासन की योजनाओं और व्यवस्थाओं की वास्तविक कार्यप्रणाली समझने का अवसर देते हैं। इससे युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के प्रति जागरूकता बढ़ती है। ईएमएस/ मोहने/ 16 मई 2026