नई दिल्ली (ईएमएस)। केंद्र सरकार ने चांदी के आयात नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए सिल्वर बार्स समेत कई श्रेणियों को ‘फ्री’ कैटेगरी से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ श्रेणी में डाल दिया है। अब व्यापारियों और आयातकों को इन उत्पादों का आयात करने के लिए सरकार से विशेष अनुमति या लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। यह फैसला वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की नई अधिसूचना के जरिए लागू किया गया है। डीजीएफटी की अधिसूचना संख्या 17/2026-27 के अनुसार, आईटीसी (एचएस) कोड 71069221 और 71069229 के तहत आने वाली सिल्वर बार्स पर नई पाबंदियां लागू होंगी। पहले इनका आयात भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के तहत ‘फ्री’ श्रेणी में किया जा सकता था, लेकिन अब इन्हें ‘रिस्ट्रिक्टेड’ कैटेगरी में शामिल कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब सीधे आयात संभव नहीं होगा और पहले सरकारी मंजूरी लेनी पड़ेगी। सरकार ने केवल सिल्वर बार्स ही नहीं, बल्कि कच्ची चांदी, अर्ध-निर्मित चांदी और चांदी के पाउडर जैसी श्रेणियों पर भी सख्ती बढ़ाई है। इन सभी उत्पादों के आयात के लिए अब विशेष अनुमति जरूरी होगी। कुछ मामलों में आयात को आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अधीन रखा गया है। यह बदलाव आयात नीति अनुसूची में संशोधन कर लागू किया गया है। सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब देश का कीमती धातुओं का आयात बिल लगातार बढ़ रहा है। केंद्र सरकार सोना और चांदी के बढ़ते आयात पर नियंत्रण कर विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ने वाले दबाव को कम करना चाहती है। इससे पहले भी सरकार सोना और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर चुकी है। इसके अलावा रत्न एवं आभूषण निर्यातकों के लिए एडवांस ऑथराइजेशन योजना के तहत ड्यूटी-फ्री गोल्ड इंपोर्ट के नियम भी कड़े किए गए थे। नए नियमों के तहत एडवांस ऑथराइजेशन योजना में प्रति लाइसेंस अधिकतम 100 किलोग्राम सोने के आयात की सीमा तय की गई है। पहली बार आवेदन करने वाली कंपनियों के लिए निर्माण इकाइयों का फिजिकल निरीक्षण भी अनिवार्य किया गया है। साथ ही पुराने लाइसेंस के तहत कम से कम 50 प्रतिशत निर्यात दायित्व पूरा करने के बाद ही नई अनुमति मिलेगी। ड्यूटी-फ्री गोल्ड आयात करने वाले निर्यातकों को अब हर 15 दिन में चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रमाणित आयात-निर्यात रिपोर्ट जमा करनी होगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोने का आयात 24 प्रतिशत से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि आयात की मात्रा में ज्यादा वृद्धि नहीं हुई, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी के कारण कुल आयात बिल बढ़ गया। भारत सबसे ज्यादा सोना स्विट्जरलैंड से आयात करता है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात और दक्षिण अफ्रीका दूसरे और तीसरे सबसे बड़े स्रोत रहे। सरकार के इस फैसले पर उद्योग संगठनों ने चिंता जताई है। ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) समेत कई संगठनों का कहना है कि ज्यादा आयात शुल्क और कड़े प्रतिबंधों से ग्रे मार्केट और तस्करी की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। हालांकि सरकार का मानना है कि इन कदमों से कीमती धातुओं के आयात पर बेहतर नियंत्रण होगा और देश के बढ़ते आयात बिल को संतुलित करने में मदद मिलेगी। चन्द्रबली सिंह / 16/05/2026