लंदन (ईएमएस)। करीब 60 हजार साल पहले निएंडरथल इंसान दांतों की सर्जरी जैसी जटिल प्रक्रिया को अंजाम देते थे। यह दावा किया है शोधकर्ता वैज्ञानिकों ने। वैज्ञानिकों को साइबेरिया की चगीरस्काया गुफा में एक निएंडरथल का दांत मिला, जिसमें बेहद सटीक तरीके से किया गया छेद दिखाई दिया। रिसर्च टीम का दावा है कि यह दुनिया में अब तक का सबसे पुराना मेडिकल इंटरवेंशन या सर्जरी का प्रमाण हो सकता है। शुरुआत में वैज्ञानिकों को लगा कि दांत में बना गड्ढा सामान्य सड़न की वजह से हुआ होगा, लेकिन माइक्रोस्कोपिक जांच में अलग ही तथ्य सामने आए। दांत की सतह पर ऐसे गोलाकार निशान मिले जो किसी नुकीले औजार को घुमाकर ड्रिलिंग करने से बनते हैं। इसके बाद वैज्ञानिकों ने जैस्पर पत्थर से बने औजारों का इस्तेमाल कर आधुनिक मानव दांतों पर प्रयोग किया और पाया कि निएंडरथल ने दांत की सड़न साफ करने के लिए बिल्कुल वैसी ही तकनीक अपनाई थी जैसी आज रूट कैनाल उपचार के दौरान उपयोग की जाती है। रिसर्च के अनुसार निएंडरथल पत्थर के बेहद बारीक और नुकीले औजारों का इस्तेमाल करते थे। चगीरस्काया गुफा से ऐसे कई औजार पहले भी मिले थे, जिन्हें अब तक शिकार और खाल उतारने के काम का माना जाता था। लेकिन नई खोज से पता चला है कि वे इन्हें मेडिकल जरूरतों के लिए भी इस्तेमाल करते थे। दांत में बने छेद की चौड़ाई करीब 4.2 मिलीमीटर और गहराई 2.6 मिलीमीटर थी, जो उस समय के हिसाब से बेहद सटीक प्रक्रिया मानी जा रही है। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि जिस निएंडरथल पर यह उपचार किया गया था, वह सर्जरी के बाद कई वर्षों तक जीवित रहा। वैज्ञानिकों को दांत पर चबाने के निशान मिले, जो ड्रिलिंग के बाद बने थे। इससे साफ संकेत मिलता है कि इलाज सफल रहा और व्यक्ति सामान्य रूप से खाना खाता रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज निएंडरथल की बुद्धिमत्ता, तकनीकी समझ और सामाजिक सहयोग को दर्शाती है। अब तक माना जाता था कि आधुनिक मानव ने करीब 14 हजार साल पहले डेंटिस्ट्री की शुरुआत की थी, लेकिन यह खोज साबित करती है कि निएंडरथल उससे भी हजारों साल पहले चिकित्सा तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे थे। इससे उनकी छवि केवल आदिम शिकारी के रूप में नहीं, बल्कि समझदार और रचनात्मक मानव समुदाय के रूप में सामने आई है। बता दें कि साइबेरिया की एक गुफा में मिली इस नई खोज ने मानव इतिहास और चिकित्सा विज्ञान की समझ को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। सुदामा/ईएमएस 18 मई 2026