राष्ट्रीय
18-May-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। आजकल बुजुर्गों और युवाओं के शरीर में अकड़न, कम ऊर्जा और पाचन संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इन समस्याओं को देखते हुए आयुष मंत्रालय ने योग को दैनिक जीवन में शामिल करने की सलाह दी है। पादहस्तासन एक ऐसा योगासन है जो शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने में बेहद प्रभावी माना जाता है। इस बारे में आयुष मंत्रालय का कहना है कि तनाव, शरीर में जकड़न और खराब पाचन जैसी समस्याएं धीरे-धीरे शरीर पर असर डालती हैं। पादहस्तासन इन परेशानियों से राहत दिलाने वाला आसान लेकिन असरदार आसन माना जाता है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर का लचीलापन बढ़ता है, मांसपेशियों में खिंचाव आता है और शरीर को नई ऊर्जा मिलती है। यह आसन खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद बताया जाता है जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं या जिन्हें पीठ और कमर दर्द की शिकायत रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार, पादहस्तासन के दौरान आगे की ओर झुकने से कमर, पीठ और पैरों की मांसपेशियों में गहरा खिंचाव आता है, जिससे अकड़न कम होती है। यह आसन रक्त संचार को बेहतर बनाने में भी मदद करता है, जिससे पूरे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और थकान कम महसूस होती है। इसके अलावा पेट के अंगों पर पड़ने वाला हल्का दबाव पाचन क्रिया को सक्रिय करता है, जिससे कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। योग विशेषज्ञ मानते हैं कि पादहस्तासन केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि मानसिक संतुलन के लिए भी लाभकारी है। नियमित अभ्यास से तनाव कम होता है, मन शांत रहता है और एकाग्रता बढ़ती है। कई लोगों को इससे नींद की गुणवत्ता में भी सुधार महसूस होता है। यही कारण है कि योग दिवस की तैयारियों के बीच इस आसन को विशेष रूप से अपनाने की सलाह दी जा रही है। पादहस्तासन करने के लिए सबसे पहले सीधे खड़े होकर दोनों पैरों को आपस में मिलाया जाता है। इसके बाद सांस छोड़ते हुए कमर से आगे की ओर झुकना होता है और हाथों को पैरों के पास जमीन तक ले जाने की कोशिश की जाती है। शुरुआती लोग जरूरत पड़ने पर घुटनों को हल्का मोड़ सकते हैं। कुछ सेकंड तक इसी स्थिति में रुकने के बाद धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में लौटना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, इसका अभ्यास रोजाना तीन से पांच बार किया जा सकता है। सुदामा/ईएमएस 18 मई 2026