-समिति ने जांच रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष बिरला को सौंपी नई दिल्ली,(ईएमएस)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा की मुश्किलें इस्तीफे के बाद भी कम होती नजर नहीं आ रही हैं। उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच कर रही तीन सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंप दी है। लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए यह रिपोर्ट सोमवार को सौंपी गई है। रिपोर्ट को जल्द ही संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाएगा। दरअसल, पिछले साल न्यायमूर्ति वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास से जले हुए नोटों की गड्डियां बरामद होने के बाद मामला सुर्खियों में आया था। इस घटना के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव से संबंधित नोटिस दिए थे, जिन्हें स्वीकार कर जांच प्रक्रिया शुरू की गई थी। मामले की जांच के लिए गठित समिति में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति चन्द्रशेखर तथा कर्नाटक उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य शामिल थे। समिति का पुनर्गठन 25 फरवरी को किया गया था। इसी बीच, न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने 10 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। उनके इस्तीफे के बाद महाभियोग की कार्यवाही तकनीकी रूप से निष्प्रभावी हो गई, लेकिन जांच प्रक्रिया जारी रही। गौरतलब है कि दिल्ली आवास से कथित रूप से जले हुए नोट मिलने की घटना के बाद से न्यायमूर्ति वर्मा लगातार विवादों और आलोचनाओं के केंद्र में रहे हैं। अब जांच रिपोर्ट संसद में पेश होने के बाद इस मामले पर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज होने की संभावना है। हिदायत/ईएमएस 19मई26