18-May-2026
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खोजी रिपोर्ट में एक टॉप-सीक्रेट डिप्लोमैटिक केबल लीक होने का दावा इस्लामाबाद,(ईएमएस)। पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान के उस विदेशी साजिश वाले दावे ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है, जिसके तहत उन्होंने खुद को सत्ता से बेदखल किए जाने के पीछे अमेरिका का हाथ बताया था। एक खोजी रिपोर्ट में एक टॉप-सीक्रेट डिप्लोमैटिक केबल लीक होने का दावा किया गया है, जिसने सत्ता परिवर्तन में वॉशिंगटन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक जांच करने वाली संस्था ने उस मूल दस्तावेज़ को प्रकाशित किया है, जिसे साइफर नाम से जाना जाता है। यह दस्तावेज ही उस क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान के इस दावे का मुख्य आधार है कि पाकिस्तान में अमेरिकी समर्थित सत्ता परिवर्तन हुआ था। इस दस्तावेज़ को केबल आई-0678 के रूप में पहचाना गया है। इसमें अप्रैल 2022 में इमरान खान के अविश्वास प्रस्ताव में हारने से ठीक पहले, वॉशिंगटन में पाकिस्तान के तत्कालीन राजदूत और अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डोनाल्ड लू के बीच हुई एक बैठक का ब्योरा दर्ज है। इमरान खान ने बार-बार दावा किया था कि अमेरिका ने उन्हें हटाने के लिए पर्दे के पीछे से काम किया, क्योंकि उनकी विदेश नीति स्वतंत्र थी और उन्होंने रूस और चीन के खिलाफ अमेरिका के साथ पूरी तरह से जुड़ने से इनकार कर दिया था। वॉशिंगटन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि इन दावों में कोई सच्चाई नहीं है और इमरान खान ने कभी भी विदेशी हस्तक्षेप को साबित करने वाला कोई सबूत पेश नहीं किया। रिपोर्ट के मुताबिक इमरान खान ने पाकिस्तान की वंशवादी राजनीतिक पार्टियों—पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी पर भी अपनी सरकार को गिराने के लिए विदेशी ताकतों के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगाया था। दोनों पार्टियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इमरान को हटाना पूरी तरह से संवैधानिक था और यह उनके घरेलू राजनीतिक विफलताओं का नतीजा था। अविश्वास प्रस्ताव के जरिए किसी पाकिस्तानी पीएम को इस तरह की प्रक्रिया से हटाए जाने का यह पहला मामला था। इसके एक साल बाद उन्हें भ्रष्टाचार के एक मामले में दोषी ठहराया गया और जेल भेज दिया। तब से इमरान खान जेल में ही बंद हैं। अब रिपोर्ट के द्वारा इस केबल को जारी किए जाने को इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ और उनके समर्थक, विदेशी दबाव के उन आरोपों के लिए अब तक के सबसे मजबूत सार्वजनिक समर्थन के तौर पर देख रहे हैं, जो पिछले चार साल से ज्यादा समय से पाकिस्तानी राजनीति पर हावी रहे हैं। इस बातचीत में इस्तेमाल किया गया वाक्यांश- सब कुछ माफ कर दिया जाएगा विशेष रूप से काफी कुछ बयां करता है। यह एक ऐसा संकेत था जो बहुत ज़्यादा छिपा हुआ नहीं था, इसका मतलब यह था कि इमरान खान को सत्ता से हटाने और उन्हें जेल भेजने से पाकिस्तान और अमेरिका के बीच संबंध और भी मज़बूत हो सकेंगे। दस्तावेज के मुताबिक डोनाल्ड लू ने सुझाव दिया था कि इस्लामाबाद और वाशिंगटन के बीच संबंध तब बेहतर हो सकते हैं, जब इमरान खान को संसदीय वोट के ज़रिए सत्ता से हटा दिया जाए। केबल में यह भी जिक्र था कि अगर इमरान खान इस चुनौती से बच निकलते हैं, तो पाकिस्तान को अमेरिका और यूरोप दोनों की ओर से अकेलेपन का सामना करना पड़ सकता है। सिराज/ईएमएस 18मई26