- शौर्य और संस्कारों के अनूठे संगम के साथ निकली राजपूत समाज की विराट शौर्य यात्रा इंदौर (ईएमएस)। ग्रामीण अंचल के राजपूत समाज द्वारा हातोद नगर में राष्ट्र-गौरव वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप, सम्राट पृथ्वीराज चौहान एवं बुंदेल केसरी महाराजा छत्रसाल की जयंती के पावन प्रसंग पर एक युगप्रवर्तक शौर्य यात्रा का आयोजन किया गया। सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना को समर्पित इस भव्य आयोजन में धाम सरकार मुख्य अतिथि के रूप में विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके पावन सानिध्य ने इस गरिमामयी समारोह के आध्यात्मिक और सामाजिक प्रभाव को और अधिक प्रगाढ़ कर दिया। संपूर्ण नगर महापुरुषों के प्रेरक जयघोष और राष्ट्रभक्ति की गूंज से सराबोर नजर आया। जय राजपूताना संघ सहित ग्रामीण क्षेत्र के विभिन्न सामाजिक घटकों के सामूहिक समन्वय से आयोजित इस यात्रा में हातोद और उसके आसपास के 40 से अधिक ग्रामों के हजारों श्रद्धालुओं और समाजजनों का अभूतपूर्व समागम हुआ। लगभग एक किलोमीटर लंबी इस वैभवशाली यात्रा में लहराती हुई भगवा ध्वजाएं, शौर्य गीतों की धुन बिखेरते पारंपरिक बैंड, नयनाभिराम बग्गियां और पारंपरिक वेशभूषा में सजे समाजजन आकर्षण का केंद्र रहे। पूर्ण अनुशासन के साथ कदमताल करते हुए युवाओं और वरिष्ठों के अनुकरणीय व्यवहार ने नागरिकों को प्रभावित किया। संपूर्ण मार्ग में शौर्य और बंधुत्व का अनूठा दृश्य उपस्थित हुआ, जिसका नगरवासियों ने 50 से अधिक स्वागत मंचों से पुष्पवृष्टि कर आत्मीय अभिनंदन किया। :: पद-प्रतिष्ठा की होड़ से परे सादगी की मिसाल :: समकालीन दौर के दिखावे और आत्म-प्रचार की प्रवृत्तियों के विपरीत, इस आयोजन के माध्यम से ग्रामीण राजपूत समाज ने सादगी और निस्वार्थ सेवा की एक नई सामाजिक परिपाटी स्थापित की है। आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें किसी भी प्रकार की पद, नाम या मंच की होड़ दिखाई नहीं दी। बिना किसी बड़े औपचारिक मंच के, संगठन के कार्यकर्ताओं ने बेहद सादगीपूर्ण ढंग से संपूर्ण व्यवस्था को संभाला। पद और प्रतिष्ठा की लालसा से मुक्त होकर किए गए इस अनुशासित जन-आयोजन की प्रबुद्ध जनों द्वारा भूरि-भूरि प्रशंसा की जा रही है। :: कुप्रथाओं के उन्मूलन का संकल्प और सम्मान :: समारोह के उत्तरार्ध में समाज को प्रगतिशील दिशा देने वाले और रचनात्मक कार्यों में संलग्न मूर्धन्य समाजसेवियों का आदरपूर्वक नागरिक अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी मंगू सिंह गोयल कांकरिया (पहलवान), भीम पटेल सोनगीर और कल्याण सिंह जमुड़ी सरवर को उनकी उल्लेखनीय लोक-सेवाओं के लिए कृतज्ञता पत्र भेंट किए गए। इसके साथ ही, सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध अलख जगाते हुए दहेज मुक्त विवाह संपन्न कराकर समाज में नव-चेतना का संचार करने वाले आदर्श युवाओं को भी सम्मानित किया गया। इस महती आयोजन ने न केवल ग्रामीण अंचल में राजपूत समाज की वैचारिक एकजुटता को प्रदर्शित किया, बल्कि यह सुसंस्कारों और कुप्रथा उन्मूलन के प्रति समाज के दृढ़ संकल्प का भी परिचायक बना। प्रकाश/18 मई 2026