क्षेत्रीय
18-May-2026
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- शिव और शक्ति विवाह का मंचन किया गया। शाजापुर (ईएमएस)। शिव और शक्ति का मिलन ब्रम्हांड का सबसे अलौकिक उत्सव माना जाता है। जब भगवान शंकर माता पार्वती से विवाह करने बारात लेकर पहुंचे तो उनकी बारात में देव-दानव-भूत-प्रेत सभी शामिल थे। उन्होंने जो विवाह उत्सव मनाया वैसा उल्लेख कहीं ओर नहीं मिलता। जगत कल्याण के लिए हुआ परमपिता शंकर और माता पार्वती का मिलन युगों-युगों के लिए वंदनीय हो गया। इसीलिए शिव-पार्वती की जोड़ी को संसार की सर्वश्रेष्ठ जोड़ी कहा जाता है। उक्त आशीर्वचन महंत 1008 अनुजदास महाराज ने सोमवार को सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव में भक्तों को प्रदान किए। उल्लेखनीय है कि श्री नित्येश्वर महादेव भागवत कथा समिति एवं सूर्या ग्रूप द्वारा आयोजित कथा महोत्सव स्थानीय रेल्वे मैदान स्टेशन रोड़ पर प्रतिदिन सांय 7.30 से रात्रि 11.30 बजे तक आयोजित किया जा रहा है, जिसके तृतीय दिवस कथा वाचक अनुजदास जी द्वारा विभिन्न कथा प्रसंगो के साथ शिव-पार्वती विवाह प्रसंग का उत्सवी वर्णन किया गया। जिसमें शिव-पार्वती का स्वरूप धारण कर बाल कलाकारों सहित भूत-प्रेतों की टोली तथा उपस्थित भक्तजनों ने जमकर झूमते-नाचते नाचते हुए शिव बारात का आनंद लिया। इस मौके पर जमकर आतिशबाजी भी की गई। इस मौके पर बड़ी संख्या में मातृशक्ति एवं नगरवासी उपस्थित रहे। सरकारी नियंत्रण से मुक्त हो मंदिरों का चढ़ावा कथा के दौरान महंत ने मंदिरों के चढ़ावे को सरकारी नियंत्रण से बाहर करने की मांग करते हुए कहा कि हिन्दू मंदिर जनास्था के वो केन्द्र हैं जहां लोगों की भक्ति हमेशा निःस्वार्थ समर्पण के उदाहरण प्रस्तुत करती नजर आती है। भारत के सांवरिया सेठ मंदिर में करोड़ों का चढ़ावा आता है जो भक्तों द्वारा चढ़ाया जाता है किंतु उसका उपयोग सरकार अपने खजाने को भरने में करती है। हमारी मांग है कि मंदिरों के चढ़ावे का उपयोग खजाना भरने के बजाय मानव सेवा के कार्यों में किया जाना चाहिए तभी उस दान का सदुपयोग हो सकेगा। कथावाचक ने देश में बांटी जा रही फ्री-सेवा पर भी अंकुश लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसंख्या और मुफ्तखोरी देश की सबसे बड़ी समस्या है। देश में मुफ्तखोरी को बंद किया जाना चाहिए। केवल तीन सेवाएं शिक्षा, चिकित्सा और न्याय व्यवस्था ही निःशुल्क होना चाहिए जिससे जरूरतमंदों की सेवा हो सके और देश का विकास हो सके। मुफ्त के गेहूं चावल के चक्कर में देश की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है। ईएमएस/ मोहने/18 मई 2026