ईरान के राष्ट्रपति ने साफ कहा- बातचीत का मतलब आत्मसमर्पण नहीं वाशिंगटन,(ईएमएस)। ईरान-अमेरिका के युद्ध में अब तक लग रहा था कि जल्दी ही दोनों पक्ष फिर आमने-सामने आ जाएंगे। अमेरिका की ओर से लगातार धमकियां मिल रही थीं, तो ईरान भी उनका जवाब दे रहा था। ऐसे में माना जा रहा था कि जल्द ही खाड़ी में फिर मिसाइलें और बम बरसेंगे। हालांकि अब राहत भरी खबर आई है कि कम से कम अमेरिका आगे के हमलों को टालने की योजना बना रहा है। पहले से ही दुनियाभर में तेल को लेकर हाहाकार मचा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित हमला फिलहाल टाल दिया है। ट्रंप ने कहा कि कतर, सऊदी अरब और यूएई के अनुरोध पर यह फैसला लिया गया है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अब ईरान के साथ गंभीर बातचीत चल रही है। वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने साफ कहा कि बातचीत का मतलब आत्मसमर्पण नहीं है। उन्होंने कहा कि तेहरान सम्मान, ताकत और अपने राष्ट्रीय अधिकारों की रक्षा करते हुए बातचीत में शामिल हुआ है। इस बीच इजराइल और लेबनान के बीच संघर्ष जारी है। अमेरिका की मध्यस्थता से युद्धविराम बढ़ाए जाने के बावजूद सोमवार को इजराइली हमलों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 2 मार्च से अब तक इजराइली हमलों और सैन्य कार्रवाई में 3020 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 9273 लोग घायल हुए हैं। उधर गाजा के लिए राहत सामग्री ले जा रहे जहाजों को रोकने को लेकर भी इजराइल की दुनिया में आलोचना हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इजराइली बलों ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में गाजा सहायता बेड़े के कई जहाजों को रोक लिया। बताया जा रहा है कि करीब 47 नौकाओं को कब्जे में लिया और सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है। इस कार्रवाई के बाद कई देशों और मानवाधिकार संगठनों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सहायता जहाजों को रोकना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, ईरान-अमेरिका वार्ता, लेबनान में जारी हमले और गाजा सहायता बेड़े को लेकर विवाद ने पूरे क्षेत्र को फिर से बड़े संकट के मुहाने पर ला खड़ा किया है। सिराज/ईएमएस 19मई26