राष्ट्रीय
19-May-2026
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नॉर्वे के एक पत्रकार को सिबी जॉर्ज ने दिखा दिया आइना नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत को लेकर पश्चिमी देशों और उनके समर्थित संगठनों द्वारा लगातार फैलाए जा रहे दुष्प्रचार पर अब भारत ने खुलकर जवाब देना शुरू किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज ने नॉर्वे और नीदरलैंड्स के नेताओं तथा पत्रकारों के सवालों का जिस आक्रामक और तथ्यपूर्ण तरीके से उत्तर दिया, उस जबाव ने पश्चिमी देशों के दोहरे मापदंड और भारत विरोधी प्रचार की पूरी पोल खोल दी है। इन दो महत्वपूर्ण घटनाक्रमों ने साफ किया है कि नई दिल्ली हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर तथ्यों, संविधान और अपने समृद्ध इतिहास के आधार पर प्रतिक्रिया देने के लिए पूरी तरह तैयार है। हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के संबंध में नॉर्वे के एक पत्रकार ने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों को लेकर सवाल उठाने की कोशिश की थी। इस पर विदेश मंत्रालय के सचिव जॉर्ज ने बेहद कड़ा और स्पष्ट जवाब देकर कहा कि भारत को समझने के लिए उसकी विशालता और लोकतांत्रिक ढांचे को समझना जरुरी है। उन्होंने कहा कि केवल कुछ तथाकथित गैर सरकारी संगठनों की रिपोर्ट पढ़कर भारत पर सवाल उठाना अज्ञानता का प्रमाण है। विदेश मंत्रालय के सचिव जॉर्ज ने पश्चिमी पत्रकारों पर निशाना साधकर कहा कि भारत में हर दिन सैकड़ों समाचार प्रसारित होते हैं और केवल दिल्ली में ही दो सौ से अधिक समाचार चैनल हैं, जो हिंदी, अंग्रेजी और अनेक भारतीय भाषाओं में केंद्र सरकार की आलोचना से लेकर हर मुद्दे पर खुली बहस करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को मौलिक अधिकार देता है और किसी भी अधिकार हनन की स्थिति में कानूनी उपाय उपलब्ध कराता है। महिलाओं के अधिकारों का उल्लेख कर उन्होंने याद दिलाया कि भारत ने स्वतंत्रता के तुरंत बाद ही महिलाओं को मतदान का अधिकार दे दिया था, जबकि पश्चिम के कई देशों में महिलाओं को यह अधिकार दशकों बाद मिला था। इस तरह, नीदरलैंड्स के द हेग में भी भारत ने पश्चिमी दुष्प्रचार का करारा जवाब दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुराष्ट्रीय कूटनीतिक यात्रा के दौरान जब डच प्रधानमंत्री रोब येटन ने भारत में अल्पसंख्यकों के कथित उत्पीड़न को लेकर चिंता जताने की कोशिश की, तब भी भारतीय विदेश मंत्रालय के सचिव जॉर्ज ने वहां बेहद आक्रामक और ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित जवाब देकर पूरे नैरेटिव को पलट दिया। उन्होंने कहा कि इसतरह के सवाल भारत की सभ्यता और इतिहास की समझ के अभाव को दर्शाते हैं। उन्होंने दुनिया को याद दिलाया कि भारत वह भूमि है जहां यहूदियों को कभी प्रताड़ना का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने बताया कि भारत में तीन करोड़ से अधिक ईसाई रहते हैं और इस्लाम भी यहां सदियों से फला-फूला है। सदियों से उत्पीड़ित समुदाय भारत में शरण लेते रहे हैं और भारत ने हमेशा उन्हें अपनाया है। भारत के इन जवाबों ने साफ कर दिया है कि नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मंचों पर किसी भी एकतरफा और पक्षपातपूर्ण टिप्पणी को अब चुपचाप स्वीकार नहीं करेगी। पश्चिमी देशों द्वारा प्रायोजित कथित गैर सरकारी संगठनों और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर भारत को कठघरे में खड़ा करने की पुरानी रणनीति अब असर खोती दिखाई दे रही है। आशीष दुबे / 19 मई 2026