मुंबई, (ईएमएस)। देश के सबसे बड़े “डिजिटल अरेस्ट” साइबर ठगी मामलों में गिरफ्तार गुजरात के 51 वर्षीय सुरेश कुमार पटेल को लगभग आठ महीने जेल में रहने के बाद मुंबई की एक सत्र अदालत से जमानत मिल गई। यह मामला एक रिटायर्ड फार्मा कंपनी के अधिकारी से 58 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी से जुड़ा है। अदालत ने जमानत देते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष चार्जशीट के साथ ऐसा कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं कर सका, जिससे आरोपी का अन्य आरोपियों से सीधा संबंध साबित हो सके। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला कि आरोपी को इस कथित अपराध से आर्थिक लाभ हुआ हो या उसके बैंक खाते में किसी संदिग्ध रकम का लेनदेन हुआ हो। मामले की शुरुआत पीड़ित की शिकायत से हुई थी। अगस्त और सितंबर 2025 के बीच साइबर ठगों ने खुद को ट्राई और सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को “डिजिटल अरेस्ट” में होने का डर दिखाया। मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तारी की धमकी देकर उनसे 58.13 करोड़ रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए गए। जांच के दौरान पुलिस ने सुरेश कुमार पटेल को गिरफ्तार किया। अभियोजन के अनुसार पटेल ने एक अन्य आरोपी के साथ मिलकर “एयरकूल एंटरप्राइजेज” नामक खाते की व्यवस्था कराई थी। इस खाते में कथित तौर पर ठगी की रकम में से 25 लाख रुपये आए थे, जिन्हें बाद में सात अलग-अलग खातों में भेजा गया। पुलिस का दावा था कि पटेल को इसके बदले क्रिप्टोकरेंसी और नकद कमीशन मिला था। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि पटेल अक्टूबर 2025 से जेल में हैं और जांच पूरी होकर चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। साथ ही, मामला मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी सबूतों पर आधारित है, जो पहले से पुलिस के कब्जे में हैं, इसलिए सबूतों से छेड़छाड़ की संभावना नहीं है। वहीं, अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए आशंका जताई कि आरोपी फरार अन्य आरोपियों की मदद कर सकता है या देश छोड़कर भाग सकता है। हालांकि अदालत ने उपलब्ध सबूतों को देखते हुए आरोपी को जमानत दे दी। संजय/संतोष झा- १९ मई/२०२६/ईएमएस