क्षेत्रीय
19-May-2026
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- ड़ीड़ी अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मियों ने दी कार्य बहिष्कार की चेतावनी - मार्च से वेतन न मिलने पर फूटा नर्सिंग ऑफिसर विनीत फैंसी और स्टाफ का गुस्सा अलीगढ़(ईएमएस)। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को अपने कंधों पर टिकाए रखने वाले कोरोना वॉरियर्स आज खुद सिस्टम की अनदेखी का शिकार होकर दाने-दाने को मोहताज हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय से एक बेहद चैंकाने वाला और परेशान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ मरीजों की चैबीसों घंटे सेवा करने वाले नर्सिंग अधिकारियों को पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं दिया गया है। अस्पताल के आईसीयू वार्ड में तैनात नर्सिंग ऑफिसर विनीत फैंसी ने अपनी सहयोगी महिला स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मिलकर विभाग और शासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों का साफ तौर पर कहना है कि मार्च महीने से लेकर अब तक उन्हें सैलरी के नाम पर सिर्फ खोखले आश्वासन मिले हैं। बाबू और अधिकारियों के चक्कर काटकर थके कर्मचारी ग्राउंड जीरो से रिपोर्ट करते हुए जब हमारी टीम ने कर्मचारियों का दर्द जाना, तो कई चैंकाने वाली बातें सामने आईं। नर्सिंग ऑफिसर विनीत फैंसी ने बताया कि हम अपनी फरियाद लेकर कई बार अस्पताल के बड़े अधिकारियों और बाबुओं (क्लर्कों) के पास जा चुके हैं। लेकिन वहाँ से हमें सिर्फ एक ही जवाब मिलता है कि सैलरी आ जाएगी। कोई भी अधिकारी हमें यह बताने को तैयार नहीं है कि वेतन किस तारीख को आएगा और इसमें इतनी देरी क्यों हो रही है। उच्च प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह मौन साधे बैठा है। दूसरे जिलों से आए कर्मचारियों पर दोहरी मार कर्मचारियों के अनुसार, यह समस्या सिर्फ एक अस्पताल की नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में एनएचएम (छभ्ड) और आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम कर रहे हजारों कर्मचारियों की है। सबसे बदतर स्थिति उन स्वास्थ्य कर्मियों की है जो दूसरे जिलों या शहरों से आकर यहाँ किराए के मकानों में रह रहे हैं। पेट्रोल और बस का किराया तक निकालने का संकट बिना सैलरी के इन कर्मचारियों के सामने मकान का किराया देने, रोजाना खाने-पीने का सामान जुटाने और यहाँ तक कि ड्यूटी पर आने-जाने के लिए पेट्रोल और बस का किराया तक निकालने का संकट खड़ा हो गया है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अब लोग कर्ज लेकर अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी कर रहे हैं। आर-पार के मूड में कर्मचारी अब होगा कार्य बहिष्कार अस्पताल प्रशासन की इस बेरुखी से तंग आकर अब इन फ्रंटलाइन वर्कर्स के सब्र का बांध टूट चुका है। जब कर्मचारियों से उनके अगले कदम के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि हम मरीजों की तकलीफ समझते हैं, इसलिए अभी तक चुपचाप काम कर रहे थे। लेकिन अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। हमारे भी बच्चे हैं, हमारा भी परिवार है। अगर सरकार ने जल्द ही हमारा वेतन जारी नहीं किया, तो हम मजबूरन श्कार्य बहिष्कार (काम बंद हड़ताल) की राह पर चलेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की होगी। क्यों नहीं समझ रहे अधिकारी मध्यमवर्गीय कर्मचारियों का दर्द पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के ये कर्मचारी कोई गैर-वाजिब मांग नहीं कर रहे हैं, ये सिर्फ अपनी मेहनत की कमाई मांग रहे हैं। यदि आईसीयू जैसे संवेदनशील वार्ड में तैनात नर्सिंग स्टाफ मजबूरी में हड़ताल पर जाता है, तो अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीजों की जान पर बन आएगी। सवाल यह उठता है कि एसी कमरों में बैठकर हर महीने समय पर सैलरी उठाने वाले आला अधिकारी इन गरीब और मध्यमवर्गीय कर्मचारियों का दर्द क्यों नहीं समझ पा रहे हैं? शासन को तुरंत इस मामले में दखल देना चाहिए, ताकि स्वास्थ्य व्यवस्था ठप होने से बच सके। सत्यवीर सिंह यादव / 19 मई, 2026