- नदी में जलस्तर पर्याप्त होने के बाद भी शहर में बूंद-बूंद का संकट; सूखी टंकियों के बीच उपजा किराए के टैंकरों का बड़ा खेल इंदौर (ईएमएस)। सूरज के तीखे तेवरों के बीच शहर में उपजे कृत्रिम जल संकट ने नगर निगम के जल प्रदाय विभाग की तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। एक तरफ निगम प्रशासन हर रोज शहर में 380 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी बांटने का दावा कर अपनी पीठ थपथपा रहा है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी और तकनीकी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस भीषण गर्मी में भी जीवनदायिनी नर्मदा नदी का जलस्तर पूरी तरह पर्याप्त है और मुख्य स्रोत पर पानी की कोई कमी नहीं है। इसके बावजूद इंदौर के पास सिर्फ नर्मदा परियोजना के पहले तीन चरणों से ही कुल 540 एमएलडी पानी की विशाल क्षमता मौजूद है। जब पीछे से पानी पर्याप्त है और सिस्टम की क्षमता भी भारी-भरकम है, तब भी जनता तक सिर्फ 380 एमएलडी पानी ही पहुँच पा रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि हर रोज करीब 160 एमएलडी पानी सिस्टम के किस लीकेज, मिसमैनेजमेंट या कुप्रबंधन की भेंट चढ़ रहा है? गौरतलब है कि इंदौर की प्यास बुझाने के लिए वर्ष 1978 में नर्मदा के प्रथम चरण (90 एमएलडी) की नींव रखी गई थी। इसके बाद 1990 के दशक में द्वितीय चरण आया, जिसकी पंपिंग क्षमता को बाद में अपग्रेड कर लगभग 180 एमएलडी किया गया। वर्ष 2007 में शुरू हुए तृतीय चरण ने शहर को 360 एमएलडी की अतिरिक्त संजीवनी दी। इन तीनों चरणों को मिलाकर इंदौर के पास 540 एमएलडी नर्मदा जल की मजबूत क्षमता है। नदी में पर्याप्त पानी होने, इस भारी-भरकम क्षमता और यशवंत सागर, बिलावली व सिरपुर तालाब जैसे स्थानीय स्रोतों के बैकअप के बाद भी अगर गर्मी की शुरुआत में ही शहर में पानी की किल्लत शुरू हो जाए, तो इसे सिस्टम की नाकामी के अलावा और क्या कहा जाएगा। :: तीखे सवाल :: लीकेज कब रुकेंगे? कुल क्षमता और सप्लाई के बीच जो 160 एमएलडी का बड़ा अंतर है, क्या वह सिर्फ पानी की बर्बादी और अवैध कनेक्शनों की भेंट चढ़ रहा है? बैकअप प्लान क्यों नहीं? तकनीकी शटडाउन होते ही पूरा शहर पानी के लिए क्यों त्राहि-त्राहि करने लगता है? निगम के पास आपातकालीन बैकअप क्यों नहीं रहता? किराए के फेरों का हिसाब कहां? जब कंट्रोल रूम से जीपीएस और मॉनिटरिंग के दावे किए जा रहे हैं, तो मैदानी स्तर पर जनता तक मुफ्त टैंकर क्यों नहीं पहुंच पा रहे? :: संकट के बीच पनपा किराए के टैंकरों का नया खेल :: इस कृत्रिम जल संकट के बीच नगर निगम में किराए के टैंकरों का खेल भी तेजी से पैर पसार रहा है। सूत्रों की मानें तो शहर की प्यास बुझाने के नाम पर हर साल गर्मी में निगम द्वारा करोड़ों रुपये के बजट से निजी टैंकर किराए पर लिए जाते हैं। खेल यह है कि ठेकेदारों और निचले मैदानी अमले की मिलीभगत से कागजों पर तो टैंकरों के कई फेरे (ट्रिप) दर्ज कर दिए जाते हैं और सरकारी खजाने से भुगतान भी उठा लिया जाता है, लेकिन हकीकत में ये टैंकर प्यासी बस्तियों तक पहुंचते ही नहीं। इतना ही नहीं, निगम के इन किराए के टैंकरों के ड्राइवरों द्वारा गरीब बस्तियों में मुफ्त पानी बांटने के बजाय रसूखदारों या कमर्शियल जगहों पर पानी बेचकर दोगुनी कमाई की जा रही है। यही कारण है कि पाइपलाइन नेटवर्क ठप होने और बोरवेल सूखने के बाद जब आम नागरिक कंट्रोल रूम पर शिकायत दर्ज कराता है, तो उसे घंटों इंतजार के बाद भी पानी नसीब नहीं होता। इसके विपरीत, मोटी रकम चुकाने वालों के घरों के बाहर निजी और रसूखदार टैंकर आसानी से खड़े नजर आते हैं। :: शटडाउन का बहाना, जनता हो रही परेशान :: जल प्रदाय व्यवस्था को सुचारू रखने के तमाम दावों के बीच मंगलवार को जल प्रदाय नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) से स्थिति की समीक्षा की गई, जहां मैदानी खामियां खुलकर सामने आईं। हमेशा की तरह इस बार भी सप्लाई ठप होने के पीछे बड़वाह में रात के समय अचानक हुए तकनीकी शटडाउन का बहाना आगे कर दिया गया। इस शटडाउन के चलते शहर की मुख्य जल टंकियां खाली रह गईं और दर्जनों रहवासी इलाकों में पानी की सप्लाई ठप हो गई। जब तक नदी में पर्याप्त पानी होने के बावजूद 540 एमएलडी के मौजूदा सिस्टम के ढीले पेंच नहीं कसे जाएंगे और टैंकरों के इस खेल पर विजिलेंस का चाबुक नहीं चलेगा, तब तक कागजी आंकड़ों से इंदौर की प्यास नहीं बुझने वाली। :: बोले जिम्मेदार : जल संकट से निपटने के लिए मैदानी स्तर पर मुस्तैद है निगम :: टैंकरों से पहुंचा रहे पानी, चौथे चरण पर भी काम जारी : गर्मी के कारण पारंपरिक जल स्रोत और बोरवेल सूखने से वाटर सप्लाई सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव जरूर आया है। बड़वाह में रात के समय हुए तकनीकी शटडाउन से जो टंकियां प्रभावित हुई थीं, वहां तत्काल अतिरिक्त टैंकर भेजकर नागरिकों को राहत दी गई है। बुधवार से स्थिति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी। जहाँ से भी शिकायत मिल रही है, वहाँ तुरंत टैंकर भेजे जा रहे हैं। दीर्घकालिक समाधान के लिए नर्मदा के चौथे चरण पर भी तेजी से काम चल रहा है। — पुष्यमित्र भार्गव, महापौर, इंदौर लापरवाही बर्दाश्त नहीं, हाइड्रेंट और सप्लाई की हो रही सीधी मॉनिटरिंग : शहर की जलप्रदाय व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए बीजलपुर नर्मदा कंट्रोल रूम का औचक निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया गया है। सभी सहायक यंत्रियों को टंकियों की स्थिति और जल वितरण की नियमित समीक्षा के निर्देश दिए गए हैं। टैंकरों के माध्यम से की जा रही सप्लाई और हाइड्रेंट भरने की प्रक्रिया की लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है। किसी भी क्षेत्र में जल आपूर्ति प्रभावित होने पर बिना देरी किए टैंकर से पानी पहुंचाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। — क्षितिज सिंघल, निगम आयुक्त, इंदौर ---------- प्रकाश/19 मई 2026