:: खजराना गणेश मंदिर में सप्तऋषि भागवत मंडल की भागवत कथा; आज श्रद्धा और उल्लास के साथ मनेगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव :: इंदौर (ईएमएस)। परमात्मा ने हमें वाणी का अमूल्य वरदान दिया है, लेकिन असंयम के कारण कई बार यही वाणी बाण बन जाती है। इतिहास में ऐसे अनेक युद्ध और अप्रिय घटनाक्रम दर्ज हैं, जो केवल वाणी के असंयम के कारण विकराल बने। हमारे आचरण में जब तक धर्म का वास्तविक समावेश नहीं होगा, तब तक मन की प्रवृत्तियां भी अपने लक्ष्य से भटकती रहेंगी। मन के विकारों से मुक्ति पाने के लिए धर्म का आश्रय अनिवार्य है। भगवान कहीं बाहर नहीं, बल्कि हमारे अंतर्मन में ही विराजमान हैं, लेकिन उन्हें अनुभूत करने के लिए अंतःकरण का मंथन बहुत जरूरी है; ठीक वैसे ही जैसे मंथन के बाद ही मक्खन से घी की प्राप्ति होती है। यह दिव्य विचार प्रख्यात भागवताचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी ने व्यक्त किए। वे खजराना गणेश मंदिर स्थित सत्संग सभागृह में सप्तऋषि भागवत मंडल के तत्वावधान में आयोजित भागवत ज्ञान यज्ञ में वामन अवतार प्रसंग की व्याख्या कर रहे थे। कथा में दिनोंदिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। मंगलवार को वामन अवतार का उत्सव बेहद गरिमामय ढंग से मनाया गया। सुमधुर भजनों की तान पर भक्तों के झूमने-नाचने का सिलसिला सतत जारी है। विशेषकर मातृशक्ति द्वारा की जा रही गरबा नृत्य की प्रस्तुतियां और समूह नृत्य आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। कथा के दौरान श्रद्धा का एक अनूठा रंग तब देखने को मिला, जब सभी श्रद्धालु लहरिया एवं पिंक रानी कलर के ड्रेस कोड में शामिल हुए, जिससे पूरा पंडाल भक्तिमय आभा से सराबोर नजर आया। कथा के शुभारंभ पर मनोरथी समूह की ओर से अशोक-आरती खंडेलवाल, हितेंद्र-वन्दना ग्रोवर, आशीष-खनक शर्मा और स्वप्न-स्वाति खंडेलवाल ने व्यास पीठ का विधि-विधान से पूजन किया। विद्वान वक्ता की अगवानी महेंद्र-दिव्या मानधन्या, रामचंद्र-उषा पितलिया एवं लक्ष्मण-चंद्रकांता कानूनगो ने की। यह कथा प्रतिदिन दोपहर 3.30 से सायं 7.00 बजे तक आयोजित की जा रही है। :: बालक ध्रुव जैसी निश्छल भक्ति से ही प्रसन्न होते हैं भगवान :: पं. तिवारी ने ध्रुव चरित्र का उदाहरण देते हुए आगे कहा कि भक्ति में संपूर्णता, निष्ठा और निश्छल श्रद्धा होना आवश्यक है। यदि हम बालक ध्रुव की तरह निष्काम भाव से ईश्वर को लक्ष्य मान लें, तो भक्ति का रंग कभी फीका नहीं पड़ेगा, बल्कि नवरंग बन जाएगा। अहंकार मनुष्य का स्वभाव है, जिससे देव भी बच नहीं पाते हैं। वामन अवतार की कथा इसी अहंकार को समूल नष्ट करने का संदेश देती है। उल्लेखनीय है कि पं. तिवारी दुबई, सिंगापुर, मॉरीशस सहित देश-विदेश के कई तीर्थस्थलों पर भागवत कथा कर सनातन धर्म की पताका फहरा चुके हैं। :: पीताम्बर परिधान में सज-धजकर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाएंगे श्रद्धालु :: कथा के अगले क्रम में बुधवार 20 मई को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भव्य आयोजन होगा, जिसके लिए पूरे कथा स्थल को विशेष रूप से श्रृंगारित किया गया है। इस उत्सव में सभी महिला व पुरुष श्रद्धालु पीताम्बर यानी पीले परिधान में सज-धजकर आएंगे। इसके बाद गुरुवार 21 मई को गोवर्धन पूजा उत्सव मनाया जाएगा, जिसके लिए सभी भक्त हरे रंग के ड्रेस कोड में शामिल होंगे। शुक्रवार 22 मई को रुक्मणी विवाह का मांगलिक प्रसंग धूमधाम से मनेगा, जिसमें श्रद्धालु अपनी पसंद के पारंपरिक परिधानों में उपस्थित रहेंगे। अंत में, समापन दिवस शनिवार 23 मई को सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष और कथा विश्राम के पावन प्रसंग में सभी श्रद्धालु लाल रंग के परिधान में अपनी सहभागिता दर्ज कराएंगे।