वॉशिंगटन (ईएमएस)। वैज्ञानिकों ने करीब 6.6 करोड़ साल पहले उल्कापिंड के कारण धरती पर मची भीषण तबाही से जुड़े कई नए और डरावने खुलासे किए हैं। करोडों साल पहले पृथ्वी पर ऐसा विनाशकारी हादसा हुआ था जिसने पूरी दुनिया की तस्वीर बदल दी। वैज्ञानिकों के अनुसार, इसी घटना ने डायनासोरों के युग का अंत कर दिया और पृथ्वी पर मौजूद अधिकांश जीवों को खत्म कर दिया। शोधकर्ताओं के अनुसार लगभग 10 किलोमीटर चौड़ा एक विशाल उल्कापिंड मेक्सिको के चिक्सुलुब इलाके से टकराया था। इस टक्कर की ताकत इतनी भयानक थी कि पूरी पृथ्वी पर तबाही फैल गई। वैज्ञानिकों के मुताबिक उल्कापिंड के टकराते ही आसमान आग के गोले बरसाने लगा। पृथ्वी का तापमान अचानक इतना बढ़ गया कि जंगलों में खुद-ब-खुद आग लग गई। लाखों डायनासोर और दूसरे जीव जलकर मर गए, जबकि जो जीव बच गए वे भूख, प्यास और गंभीर चोटों के कारण धीरे-धीरे खत्म होने लगे। कुछ ही समय में धरती पर करोड़ों जानवरों की लाशें फैल गईं और सड़न की भयानक बदबू पूरी दुनिया में फैलने लगी। शोधकर्ताओं का कहना है कि उस समय पृथ्वी का वातावरण सड़ती लाशों और सड़ी हुई वनस्पतियों जैसी दुर्गंध से भर गया था। हवा में सल्फर और जहरीली गैसों की मात्रा इतनी बढ़ गई थी कि सांस लेना भी मुश्किल हो गया था। इसके बाद एसिड वर्षा शुरू हुई, जिससे नदियां, झीलें और समुद्र तक जहरीले हो गए। पेड़-पौधे नष्ट होने लगे और पूरी खाद्य श्रृंखला टूट गई। इस टक्कर का असर केवल आग और जहरीली बारिश तक सीमित नहीं था। वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी पर सुपरसोनिक गति वाली हवाएं चलने लगीं, जो जंगलों को जड़ से उखाड़ देती थीं। टक्कर से उठी धूल और मलबे की मोटी परत ने कई वर्षों तक सूरज की रोशनी को रोक दिया। इससे पृथ्वी पर “ग्लोबल विंटर” जैसी स्थिति बन गई और तापमान तेजी से गिरने लगा। समुद्र में करीब 100 मीटर ऊंची सुनामी उठी, जिसने तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई। विशेषज्ञों के मुताबिक इस आपदा में पृथ्वी की लगभग 75 प्रतिशत प्रजातियां हमेशा के लिए खत्म हो गईं। हालांकि इसी विनाश के बाद छोटे स्तनधारी जीवों को विकसित होने का मौका मिला और आगे चलकर इन्हीं से मानव का विकास हुआ। आज भी मेक्सिको में लगभग 180 किलोमीटर चौड़ा चिक्सुलुब क्रेटर मौजूद है, जहां वैज्ञानिक लगातार अध्ययन कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अंतरिक्ष में अब भी ऐसे कई विशाल उल्कापिंड मौजूद हैं। सुदामा/ईएमएस 20 मई 2026