खेल
21-May-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे सफल टेस्ट कप्तानों में शामिल रहे विराट कोहली ने उन कारणों का खुलासा किया है जिनके कारण उन्होंने राष्ट्रीय टीम की कप्तानी छोड़ी थी। कोहली ने कहा कि नेतृत्व और बल्लेबाजी के लगातार दबाव ने उन्हें पूरी तरह से थका दिया था, जिसके बाद उन्हें लगा जैसे उनके पास देने के लिए कुछ नहीं बचा है। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि किस तरह एक कप्तान हमेशा सवालों के घेरे में रहता है, चाहे वह जीते या हारे। कोहली ने बताया कि कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश ने उनकी सारी ऊर्जा खींच ली। उन्होंने उस असाधारण मानसिक दबाव का जिक्र किया जिसमें एक कप्तान हमेशा सवालों के घेरे में रहता है। अगर आप जीते और आपने रन नहीं बनाए तो आपसे आपके प्रदर्शन को लेकर सवाल किए जाएंगे। और अगर आपने प्रदर्शन किया और टीम नहीं जीती तब आप पर परिणामों को लेकर सवाल उठेंगे, कोहली ने स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वह हमेशा इन दोनों चुनौतियों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करते रहे। विराट ने बताया कि वह पहले बल्लेबाजी इकाई के केंद्र बिंदु बने और फिर टीम के नेतृत्व के भी। उन्हें शुरुआत में यह अंदाजा ही नहीं हुआ कि इन दोनों भूमिकाओं का उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर कितना बड़ा भार पड़ेगा। मैं बहुत ज्यादा प्रेरित था कि भारतीय क्रिकेट को शिखर पर बनाए रखना है, इसलिए मैंने इस ओर ध्यान नहीं दिया, उन्होंने कहा। लेकिन जब मैंने कप्तानी छोड़ी, तब मैं पूरी तरह से खप चुका था, जैसे मेरे पास देने के लिए अब कुछ और बचा ही नहीं हो… वह भयंकर था। इस दौरान विराट कोहली ने मुख्य कोच राहुल द्रविड़ और बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौर के प्रति अपने गहरे आभार को भी व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि जब वह 2021 से 2022 के बीच टेस्ट क्रिकेट में अपने करियर के एक कठिन दौर से गुजर रहे थे, तब इन दोनों ने उनका बहुत समर्थन किया। 2016 से 2019 के शानदार प्रदर्शन के बाद, कोहली का टेस्ट औसत 2021 में 28.21 और 2022 में 26.5 तक गिर गया था। हालांकि, 2023 में उन्होंने वापसी करते हुए 8 टेस्ट में 55.91 की औसत से 671 रन बनाए। कोहली ने कहा, राहुल भाई और विक्रम राठौर… मैं यह कई बार कह चुका हूं। मैं जब भी उन्हें देखता हूं, जब भी उनसे मिलता हूं, तो मैं हमेशा उनको अपने दिल की गहराइयों से धन्यवाद देता हूं। गिरजा/ईएमएस 21 मई 2026