राज्य
21-May-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। शादी के बाद महिला का अपने नाम के साथ पति का सरनेम जोड़ना एक सामान्य सामाजिक परंपरा है, लेकिन दिल्ली की एक महिला के लिए यही परंपरा और बदलाव एक बड़ी परेशानी का सबब बन गया। बीमा कंपनी ने सिर्फ नाम में अंतर का हवाला देकर महिला की मैच्योर हुई जीवन बीमा पॉलिसी की लाखों रुपये की राशि रोक दी। इसके चलते महिला को इंसाफ पाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी और अंत में उसकी जीत हुई और उसके हक में फैसला सुनाया गया। उत्तर-पूर्वी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इसे सेवा में कमी का दोषी मानते हुए बीमा कंपनी को ब्याज सहित पूरी बीमा राशि लौटाने का आदेश दिया है। आयोग के अध्यक्ष सुरिंदर कुमार शर्मा और सदस्य आदर्श नैन की बेंच ने महिला का पक्ष सुनने के बाद अपने आदेश में यह स्पष्ट कर दिया कि तकनीकी कारणों का सहारा लेकर उपभोक्ता के वैध दावे को रोका नहीं जा सकता। यह मामला दिल्ली के यमुना विहार में रहने वाली प्रीति विंडलेश की शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने 24 दिसंबर 2012 को आईएनजी लाइफ से एक जीवन बीमा पॉलिसी खरीदी थी। आईएनजी लाइफ बाद में एक्साइड लाइफ और फिर एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में मर्ज हो गई थी। दिसंबर 2023 में पॉलिसी के मैच्योर होने पर कंपनी ने उनके नाम 5,12,069 रुपये का एक चेक जारी किया। हालांकि, चेक उपभोक्ता के पुराने नाम ‘प्रीति’ पर जारी किया गया, जबकि शादी के बाद उन्होंने अपने नाम में पति का सरनेम जोड़कर इसे ‘प्रीति विंडलेश’ कर लिया था और अन्य दस्तावेज में भी यही नाम अपडेट करा लिया था। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/21/ मई/2026