21-May-2026
...


-फिर आया सच सामने तो ‘रेडियो कैरोलीन’ ने हाथ जोड़कर मांगी माफी लंदन,(ईएमएस)। ब्रिटेन के राजघराने और दुनिया भर में मौजूद उनके चाहने वालों के बीच उस समय हड़कंप मच गया, जब अचानक एक रेडियो स्टेशन पर खबर सुनी- ‘किंग चार्ल्स का निधन हो गया है!’ ये सुनते ही लोग परेशान हो गए। सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ हंगामा मच गया और लोग सच जानने बेताब थे। हालांकि, कुछ ही देर में सच सामने आया, उसने हर किसी को हैरान कर दिया। दरअसल, किंग चार्ल्स बिल्कुल ठीक हैं और ये सब रेडियो स्टेशन की भारी लापरवाही की वजह से हुआ था, जिसके उसे हाथ जोड़कर माफी मांगनी पड़ी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ये अजीबोगरीब वाकया ब्रिटेन के मशहूर रेडियो स्टेशन ‘रेडियो कैरोलीन’ पर मंगलवार की दोपहर को हुआ था। रेडियो पर सामान्य प्रोग्राम चल रहा था, तभी अचानक कंप्यूटर में आए एक तकनीकी खराबी की वजह से वो इमरजेंसी ब्रॉडकास्ट प्रोटोकॉल एक्टिवेट हो गया, जो ब्रिटेन के राजा या रानी की मौत के समय बजाया जाता है, जैसे ही सिस्टम में ये खराबी आई, रेडियो पर बिना किसी इंसानी दखल के किंग चार्ल्स-3 के निधन का पूर्व-रिकॉर्डेड अनाउंसमेंट लाइव हो गया। बता दें ब्रिटेन में एक नियम है कि जब भी किसी रॉयल का निधन होता है तो देश के सभी रेडियो और टीवी स्टेशनों को कुछ समय के लिए शांत होना पड़ता है और शोक संगीत बजाना होता है। ‘रेडियो कैरोलीन’ के साथ भी बिल्कुल यही हुआ। किंग चार्ल्स की मौत की गलत घोषणा होते ही रेडियो स्टेशन पूरी तरह शांत हो गया। जब तक स्टूडियो में बैठे स्टाफ को समझ आता कि कंप्यूटर ने कितना बड़ा ब्लंडर कर दिया है, तब तक ये खबर हवा की तरह फैल चुकी थी! जैसे ही स्टाफ को अपनी गलती का एहसास हुआ, उन्होंने तुरंत सिस्टम को सुधारा, नॉर्मल प्रोग्रामिंग वापस शुरू की और ऑन-एयर आकर माफी मांगी! इस पूरे हंगामे के बाद रेडियो कैरोलीन के स्टेशन मैनेजर पीटर मूर ने सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक बयान जारी कर सफाई दी! उन्होंने कहा ‘एक कंप्यूटर खराबी के कारण ‘डेथ ऑफ अ मोनार्क’ यानी राजा के निधन का प्रोटोकॉल का प्रोसीजर गलती से ट्रिगर हो गया था। ये एक ऐसा सिस्टम है जिसे ब्रिटेन के सभी स्टेशन हमेशा तैयार रखते हैं, इस उम्मीद के साथ कि कभी इसकी जरूरत न पड़े। हम महामहिम किंग चार्ल्स और अपने सभी श्रोताओं से इसके कारण पहुंची ठेस के लिए बिना शर्त माफी मांगते हैं। बता दें ‘रेडियो कैरोलीन’ कोई आम स्टेशन नहीं है। इसकी शुरुआत 1964 में एक ‘पायरेट रेडियो’ यानी समुद्री डाकू या अवैध रेडियो के रूप में हुई थी। उस जमाने के मशहूर बुलेटिन का दबदबा हुआ करता था, जिसे चुनौती देने के लिए इस स्टेशन के लोग ब्रिटिश समुद्र तट के पास खड़े जहाजों से अवैध रूप से म्यूजिक ब्रॉडकास्ट करते थे। साल 2009 में आई हॉलीवुड फिल्म ‘द बोट दैट रॉकड’ भी इसी रेडियो स्टेशन की असली कहानी से प्रेरित थी। बहरहाल, अपनी इस पुरानी और बिंदास इमेज के बावजूद, कंप्यूटर की एक छोटी सी गलती ने इस बार रेडियो स्टेशन को ऐसा झटका दिया है कि वे इसे जिंदगी भर नहीं भूलेंगे। सिराज/ईएमएस 21मई26