राज्य
21-May-2026
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मुंबई, (ईएमएस)। बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर संजय पांडे को उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी सभी कार्यवाहियों को रद्द कर दिया। यह मामला कारोबारी संजय पुनमिया द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्हें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त परमवीर सिंह को शहरी भूमि सीमा घोटाले में झूठा फंसाने के लिए दबाव डाला गया था। मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायाधीश सुमन श्याम की खंडपीठ ने कहा कि एफआईआर का पंजीकरण ही कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग था। संजय पांडे की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि उनकी और शिकायतकर्ता संजय पुनमिया की कभी मुलाकात या बातचीत तक नहीं हुई। याचिका में यह भी कहा गया कि कथित घटना 2021 की थी, जबकि FIR अगस्त 2024 में दर्ज की गई, यानी तीन साल से अधिक की देरी के बाद, जिससे शिकायत की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है। पांडे की ओर से वरिष्ठ वकील मिहिर देसाई ने अदालत में तर्क दिया कि यह एफआईआर केवल उन्हें निशाना बनाने के उद्देश्य से दर्ज की गई थी। वहीं सह-आरोपी अधिवक्ता शेखर जगताप की ओर से वरिष्ठ वकील राजेश शाकधर ने कहा कि यह मामला न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करने जैसा है। शिकायतकर्ता संजय पुनमिया की ओर से वकील रिजवान मर्चेंट ने अदालत में कहा कि उन्हें कई मामलों में झूठा फंसाया गया और 2016 के एक मामले में पांच साल बाद दोबारा जांच कर उन्हें आरोपी बनाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि शेखर जगताप ने विशेष लोक अभियोजक नियुक्त न होने के बावजूद अदालत को गुमराह किया, जिससे उनकी जमानत अर्जी खारिज हो गई। हालांकि, पुनमिया के वकील ने फैसले पर दो सप्ताह की रोक लगाने की मांग की ताकि वे सुप्रीम कोर्ट जा सकें, लेकिन हाईकोर्ट ने इस मांग को ठुकरा दिया। इस मामले में शेखर जगताप, श्यामसुंदर अग्रवाल, सरदार पाटिल, किशोर भालेराव और मनोहर पाटिल को भी हाईकोर्ट से राहत मिली। संजय/संतोष झा- २१ मई/२०२६/ईएमएस