-मुफलिसी में गुजारी जिंदगी, अब सम्मान पाकर खुश, सरकार का माना आभार अलवर,(ईएमएस)। वाद्य यंत्र भपंग बजाने के लिए गफरुद्दीन मेवाती जोगी को पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। उन्हें 25 मई को दिल्ली में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। 25 जनवरी को भारत सरकार ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा की थी। पद्मश्री मिलने को लेकर गफरुद्दीन मेवाती जोगी ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से इतने सालों बाद यह पुरस्कार मिल रहा है, जिससे उन्हें खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार उन्हें 20-25 साल पहले मिल जाना चाहिए था। वह पीएम मोदी, केंद्र सरकार और राजस्थान सरकार के बहुत आभारी हैं। उन्होंने कहा कि जिंदगी भर की मेहनत का फल उन्हें मिला है और इससे वह खुश हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृति को बचाने के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्हें उम्मीद है कि ऐसा रोजगार मिलता रहे, जिससे वह अपना काम जारी रख सकें और परिवार का पालन-पोषण भी कर सकें। उन्होंने सरकार से इस कला को और बढ़ावा देने की मांग की। भपंग वादन के जरिए सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार को लेकर गफरुद्दीन ने कहा कि मैं डबल इंजन की अपनी सरकार के साथ हूं। भारत सरकार और राजस्थान सरकार की जो जन कल्याणकारी योजनाएं हैं, उसका मैंने प्रचार भी किया। गांव-गांव जाकर अभी प्रचार कर रहा हूं। राजस्थान सरकार की ग्राम रथ योजना को लेकर उन्होंने कहा कि वह लोगों को तलैया खुदवाने, तारबंदी करवाने, पशुओं का टीकाकरण कराने और जीवन बीमा करवाने जैसी योजनाओं के बारे में बताते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार से उन्हें भी कुछ सहायता देगी। बता दें गफरुद्दीन मेवाती जोगी की जिंदगी कभी ऐसे दौर से गुजरी, जब बचपन में वह अपने पिता के साथ घर-घर जाकर भजन और दोहे गाकर आटा मांगते थे और उससे परिवार का पेट भरता था। उनका सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा है। भारत सरकार की ओर से पद्मश्री पुरस्कार की घोषणा में जब गफरुद्दीन का नाम सामने आया तो अलवर के लोक कलाकारों में खुशी की लहर दौड़ गई। अलवर के मेवात क्षेत्र के प्रसिद्ध वाद्य यंत्र भपंग को देश-दुनिया में पहचान दिलाने वाले गफरुद्दीन करीब 60 देशों में अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं। वह 1978 में अलवर आए थे। मूल रूप से वह भरतपुर जिले के रहने वाले हैं। अपनी कला के लिए उन्हें प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, जिला स्तर, राज्य स्तर और केंद्र स्तर पर कई सम्मान मिल चुके हैं। कला अकादमी की ओर से भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। 68 साल के गफरुद्दीन मेवाती का घर साधारण है, लेकिन पद्मश्री पुरस्कार की घोषणा के बाद उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। उनका घर अब किसी सेलिब्रिटी के घर से कम नहीं दिखता। 1992 में उन्होंने पहली बार विदेश में अपनी कला का प्रदर्शन किया था। वाद्य यंत्र भपंग को गफरुद्दीन मेवाती पुश्तैनी तौर पर बजाते आ रहे हैं। उनका बेटा शाहरुख मेवाती इस परंपरा की आठवीं पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहा है। शाहरुख ने मेवात संस्कृति पर पीएचडी की है। भपंग के साथ महाभारत की कथाओं को मेवात क्षेत्र में ‘पांडव कड़े’ के रूप में गाया और प्रस्तुत किया जाता है। सिराज/ईएमएस 22मई26