अंतर्राष्ट्रीय
22-May-2026


अब तक 481 मासूम बच्चों की मौत ढाका (ईएमएस)। बांग्लादेश वर्तमान में खसरे के भयानक प्रकोप से जूझ रहा है, जो कि देश को एक बड़े स्वास्थ्य संकट में धकेल दिया है। इस जानलेवा बीमारी से अब तक 481 मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 66,000 मामलों की पुष्टि या आशंका जाहिर की गई है। इस गंभीर स्थिति के बीच, यूनिसेफ ने चौंकाने वाला खुलासा किया है, जिसमें कहा गया है कि उसने पूर्व अंतरिम सरकार को वैक्सीन की गंभीर कमी के बारे में पहले ही कई बार आगाह किया था। यूनिसेफ के अनुसार, इन चेतावनियों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया, जिसके परिणामस्वरूप हजारों बच्चे इस संकट में फंस गए हैं, जबकि समय रहते इस संकट को आसानी से टाला जा सकता था। ढाका में एक प्रेसवार्ता के दौरान, यूनिसेफ की प्रतिनिधि राणा फ्लावर्स ने बताया कि संस्था ने स्वास्थ्य मंत्रालय को गंभीर मुद्दे पर 5-6 पत्र लिखे थे और लगभग 10 महत्वपूर्ण बैठकों में भी प्रमुखता से उठाया था। रिपोर्ट के अनुसार, ये चेतावनियां साल 2024 से 2026 की अवधि के दौरान लगातार दी जा रही थीं। यूनिसेफ के उप कार्यकारी निदेशक टेड शायबान ने पिछले साल अगस्त में बांग्लादेश का दौरा कर विदेश मंत्रालय के साथ बैठक में भी समस्या को हल करने का आग्रह किया था। मौजूदा स्वास्थ्य मंत्री सकावत हुसैन ने पूर्व सरकार पर वैक्सीन की कमी को विरासत में छोड़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि जब तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था, तब सरकारी स्टॉक में वैक्सीन की एक भी खुराक उपलब्ध नहीं थी। यूनिसेफ ने इस भारी किल्लत का कारण वैक्सीन खरीद प्रक्रिया में बेवजह की देरी और पिछली सरकार द्वारा पुरानी खरीद प्रणाली को अचानक बदलना बताया, जिससे आपूर्ति व्यवस्था ध्वस्त हो गई। मार्च के बाद से हुई 481 बच्चों की मौतों और हजारों संक्रमण मामलों के साथ, हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की मौजूदा सरकार ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है। यूनिसेफ ने भी जांच में पूरा सहयोग देने का वादा किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकार से युद्ध स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाने और स्थानीय केंद्रों पर ‘फीवर कॉर्नर’ स्थापित करने की अपील की है। इस त्रासदी के बाद ढाका की सड़कों पर जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। बुधवार को धनमंडी में प्रदर्शनकारियों ने पूर्व मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस और स्वास्थ्य सलाहकार नूरजहां बेगम के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग को लेकर एक विशाल मानव श्रृंखला बनाई। लोग पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की भी मांग कर रहे हैं, क्योंकि इस पूरे संकट को एक ‘टाला जा सकने वाला संकट’ माना गया है। आशीष दुबे / 22 मई 2026