राज्य
22-May-2026
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:: खजराना गणेश मंदिर परिसर में में चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ में मनाया गया कृष्ण-रुक्मणी विवाह का उत्सव – आज समापन :: इंदौर (ईएमएस)। पश्चिम की संस्कृति डूबते हुए सूरज की है जहां विवाह से पहले तलाक हो जाता है या विवाह के बाद सात माह भी रिश्ता नहीं चल पाता। आज पश्चिमी देशों में सामाजिक एवं नैतिक मूल्य टूट रहे हैं। वहां चार लोग एक परिवार में 4 दिन नहीं रह सकते, हम 40 सदस्यों का परिवार चार पीढ़ियों तक साथ चलाते हैं। कृष्ण और रुक्मणी का विवाह रुक्मणी के मंगल का प्रतीक है। संस्कृति और संस्कारों पर आधारित है हमारा भारत का सनातन समाज, जिसकी पहचान आज भी विश्व गुरु के रूप में हो रही है। जितने ऋषि, मुनि, भगवान और भक्त भारत भूमि पर हुए हैं, उतने दुनिया के किसी अन्य देश में नहीं हुए। हमारी आस्था और श्रद्धा हमारी परम्पराओं में जिन्दा है। ये दिव्य विचार हैं भागवताचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी के, जो उन्होंने सप्तऋषि भागवत मंडल के तत्वावधान में पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में शुक्रवार की शाम को खजराना गणेश मंदिर स्थित सत्संग सभागृह में चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ में कृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग की व्याख्या के दौरान व्यक्त किए। कथा में रुक्मणी विवाह का उत्सव धूमधाम से मनाया गया। जैसे भी भगवान कृष्ण अपनी बारात लेकर रुक्मणी के यहाँ पहुंचे समूचा सभागृह भगवान के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु नाचने-झूमने लगे और भगवान के जयघोष के बीच कृष्ण-रुक्मणी ने एकदूजे को वरमाला पहनाई। कथा शुभारम्भ के पूर्व मनोरथी समूह की ओर से अशोक-आरती खंडेलवाल, महेंद्र-दिव्या मानधन्या, रामचंद्र-उषा पितलिया आदि ने व्यास पीठ का पूजन किया। विद्वान वक्ता की अगवानी लक्ष्मण-चंद्रकांता कानूनगो, हितेंद्र-वन्दना ग्रोवर, आशीष-खनक शर्मा एवं स्वप्न-स्वाति खंडेलवाल ने की। कथा का समापन शनिवार को दोपहर 3.30 से शाम 7 बजे तक सुदामा प्रसंग एवं भागवत पूजन के साथ होगा। :: आज सुदामा चरित्र :: सप्त ऋषि भागवत मंडल के अशोक खंडेलवाल ने बताया कि कथा में शनिवार 23 मई को सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष एवं कथा विश्राम के प्रसंग में श्रद्धालु लाल रंग के परिधान में भागीदार बनेंगे। इसके साथ ही कथा के समापन पर भागवताचार्य पं. पुष्पानंदन पवन तिवारी का सम्मान भी किया जाएगा। पं. तिवारी ने कथा के दौरान कहा कि भागवत का श्रवण मनुष्य को निर्भय और भक्तिमय बनाता है। विवाह का बंधन हमारी परम्पराओं को मजबूत और मर्यादित बनाने वाला है। अपनी संस्कृति पर हमें गर्व और गौरव होना चाहिए। यह सनातन संस्कृति का ही फल है कि भारतीय समाज आज भी मर्यादा में रहते हुए विदेशों में भी श्रद्धा और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। भागवत पर अनेक शोधकार्य आज भी हो रहे हैं। फिर भी अब तक कोई सम्पूर्णता प्राप्त नहीं कर पाया है। यही भगवान की वाणी का ग्रन्थ होने का सबसे मजबूत प्रमाण है। प्रकाश/22 मई 2026 संलग्न चित्र : इंदौर। खजराना गणेश मंदिर पर सप्तऋषि भागवत मंडल की मेजबानी में चल रही भागवत कथा में कृष्ण-रुक्मणी विवाह उत्सव मनाते श्रद्धालु।