राष्ट्रीय
25-May-2026


विदेश मंत्रियों की वार्ता में अहम मुद्दों पर चर्चा नई दिल्ली(ईएमएस)। भारत और अमेरिका ने अपने द्विपक्षीय रिश्तों में हाल के दिनों में आई तल्खी को पीछे छोड़ते हुए अपनी रणनीतिक साझेदारी को एक नई और मजबूत दिशा देने का स्पष्ट संकेत दिया है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चार दिवसीय भारत यात्रा पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच नई दिल्ली में एक व्यापक और बेहद महत्वपूर्ण वार्ता संपन्न हुई। इस उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान व्यापार, वीजा प्रक्रियाओं में सरलता, ऊर्जा सुरक्षा, आतंकवाद, पश्चिम एशिया का गहराता संकट और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति जैसे कई संवेदनशील और दूरगामी मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत को अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक बताते हुए आश्वस्त किया कि दोनों देशों के संबंधों की गति कतई धीमी नहीं हुई है, बल्कि मौजूदा अमेरिकी प्रशासन के कार्यकाल के अंत तक यह साझेदारी और अधिक मजबूत होकर उभरेगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि व्यापारिक मतभेदों को लेकर बनी धारणाओं को आपसी संबंधों की कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। दरअसल, पिछले कुछ महीनों में दोनों लोकतांत्रिक देशों के संबंधों में कुछ कड़वाहट और तनाव देखने को मिला था। अमेरिका द्वारा भारत पर कुछ पाबंदियां या पेनाल्टी लगाए जाने और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत-पाकिस्तान सैन्य तनाव को कम कराने में अपनी भूमिका को लेकर दिए गए बयानों ने नई दिल्ली में थोड़ी असहजता पैदा की थी। इस पृष्ठभूमि में जयशंकर और रुबियो की यह मुलाकात रिश्तों में संतुलन और पुराना भरोसा बहाल करने की एक बड़ी कोशिश मानी जा रही है। बैठक के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत की विदेश नीति की प्राथमिकताओं को बहुत ही स्पष्ट ढंग से रखा और वैश्विक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक पांच सूत्रीय दृष्टिकोण पेश किया। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि भारत किसी भी वैश्विक संघर्ष के समाधान के लिए केवल संवाद और कूटनीति का प्रबल समर्थक है। इसके साथ ही उन्होंने समुद्री व्यापार की निर्बाध आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पूर्ण सम्मान की वकालत की। जयशंकर ने वैश्विक संसाधनों और बाजार हिस्सेदारी को भू-राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किए जाने का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए भरोसेमंद साझेदारियों और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है। ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर जयशंकर ने अमेरिका के समक्ष भारत की चिंताओं को प्रमुखता से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता से भारत की ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक हित सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। भारत के लिए ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण बेहद जरूरी है और वैश्विक ऊर्जा बाजार को कृत्रिम रूप से बाधित नहीं किया जाना चाहिए। भारत और अमेरिका दोनों की यह साझा जिम्मेदारी है कि वैश्विक ऊर्जा कीमतें नियंत्रित रहें। उन्होंने विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में निर्बाध समुद्री आवाजाही की आवश्यकता पर जोर दिया और स्पष्ट किया कि भारत अमेरिका, इजरायल, ईरान और खाड़ी देशों सभी के साथ स्वतंत्र और मजबूत संबंध रखता है। भारत इन रिश्तों को किसी अन्य देश की कीमत पर नहीं देखता और अपनी बहु-पक्षीय संरेखण (मल्टी-अलाइनमेंट) नीति के तहत अमेरिका, रूस, यूरोप और यूक्रेन जैसे सभी देशों के साथ संतुलित ढंग से आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है। वीरेंद्र/ईएमएस/25मई 2026