क्षेत्रीय
25-May-2026
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- 187 परिवारों की सहभागिता, शिक्षार्थियों को परोसा आत्मीयता का भोजन, कुटुंब प्रबोधन एवं पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश - मंचासीन अतिथि। - मौजूद परिवार। शाजापुर (ईएमएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघ शिक्षा वर्ग (व्यवसायी) के अंतर्गत रविवार की शाम दुपाड़ा रोड स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में मातृहस्त भोजन कार्यक्रम अत्यंत आत्मीय एवं पारिवारिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में नगर के 187 परिवारों की मातृशक्ति ने सहभागिता करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शिक्षार्थियों के लिए अपने हाथों से प्रेमपूर्वक भोजन तैयार कर लाया तथा स्वयं शिक्षार्थियों के साथ बैठकर भोजन ग्रहण कराया। कार्यक्रम का वातावरण भारतीय पारिवारिक संस्कारों, अपनत्व और स्नेह से ओतप्रोत दिखाई दिया। मातृशक्ति द्वारा घरों से विविध प्रकार के स्वादिष्ट पकवान, भोजन सामग्री तथा भोजन परोसने के लिए आवश्यक बर्तन भी साथ लाए गए। संघ शिक्षा वर्ग के शिक्षार्थियों को माताओं ने स्नेहपूर्वक भोजन परोसा, जिससे पूरा परिसर पारिवारिक समरसता और आत्मीयता के भाव से भर उठा। इस मौके पर मुख्य वक्ता के रूप मे रतलाम विभाग प्रचारक कृष्णकांत ने अपने उद्बोधन में संत शिरोमणि संत रविदास जी की प्रेरणादायी कथा का वर्णन करते हुए समाज में समरसता, सेवा और संस्कारों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में परिवार केवल संबंधों का समूह नहीं, बल्कि संस्कारों की प्रथम पाठशाला है। मुख्य वक्ता ने कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परिवारों के माध्यम से ही समाज में संस्कार, सद्भाव और राष्ट्रभावना का विकास संभव है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण को वर्तमान समय की आवश्यकता बताते हुए प्रत्येक परिवार को वृक्षारोपण एवं प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के समापन पर संघ शिक्षा वर्ग के शिक्षार्थियों द्वारा उपस्थित परिवारों को पर्यावरण संरक्षण के संदेश स्वरूप फलदार पौधे भेंट किए गए। यह संदेश दिया गया कि पौधारोपण केवल पर्यावरण रक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढि़यों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। मातृहस्त भोजन कार्यक्रम ने संघ के पारिवारिक एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण को जीवंत करते हुए समाज में आत्मीयता, संस्कार और राष्ट्रभावना का प्रेरक संदेश दिया। ईएमएस/राजेश कलजोरिया/ 25 मई 2026