राज्य
26-May-2026
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- कॉलेजों में बनेगी एंटी-रैगिंग स्क्वॉड - शिकायतों के लिए तीन-स्तरीय व्यवस्था - छात्रावासों और कैंपस में नियमित एवं आकस्मिक जांच अभियान चलाने के निर्देश भुवनेश्वर (ईएमएस)। ओडिशा सरकार ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में रैगिंग की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश जारी किए हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों के मद्देनजर सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को एंटी-रैगिंग तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने को कहा है। विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, कॉलेज परिसरों और छात्रावासों में चौबीसों घंटे निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए एंटी-रैगिंग स्क्वॉड, एंटी-रैगिंग कमेटी और मॉनिटरिंग सेल का गठन या पुनर्गठन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। साथ ही नियमित और औचक निरीक्षण कर उसकी रिपोर्ट सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। यह कदम 25 अगस्त 2025 को आयोजित एनएचआरसी की ओपन हाउस चर्चा के बाद उठाया गया है। चर्चा का विषय उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग की रोकथाम और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण का निर्माण था। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले का उल्लेख करते हुए कहा था कि छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करना शैक्षणिक संस्थानों की प्रमुख जिम्मेदारी है। उच्च शिक्षा विभाग ने विशेष रूप से छात्रावासों और कैंपस के संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ाने को कहा है। इसके लिए ड्यूटी रोस्टर तैयार करने तथा नियमित एवं आकस्मिक जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने एंटी-रैगिंग समितियों में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है। इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्थान प्रमुखों को सौंपी गई है। रैगिंग संबंधी शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए तीन-स्तरीय व्यवस्था लागू की जाएगी। इसमें संस्थान स्तर पर शिकायत निवारण सेल, मॉनिटरिंग एजेंसी और आवश्यकता पड़ने पर जिला स्तरीय समिति शामिल होगी। शिकायत का निपटारा करने से पहले पीड़ित छात्र से प्रतिक्रिया लेने की भी व्यवस्था की जाएगी, ताकि समाधान की संतुष्टि सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा नए छात्रों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम, जागरूकता अभियान और एंटी-रैगिंग संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। छात्रों को काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराने पर भी विशेष बल दिया गया है। उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी शिक्षण संस्थानों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के 2009 के एंटी-रैगिंग नियमों तथा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा।