राज्य
26-May-2026
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- इंदौर में बड़ा गणपति के दर्शन कर धार और उज्जैन रवाना हुए सुमेरु पीठाधीश्वर; भोजशाला में की वाग्देवी की पूजा इंदौर/धार (ईएमएस)। काशी सुमेरु पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रचंद्र सरस्वती महाराज का मंगलवार को अहिल्या नगरी में मंगल आगमन हुआ। अपने संक्षिप्त प्रवास के दौरान शंकराचार्य ने सर्वप्रथम शहर के ऐतिहासिक व प्रसिद्ध बड़ा गणपति मंदिर पहुंचकर भगवान गणेश के विधि-विधान से दर्शन-पूजन किए और विश्व कल्याण की मंगलकामना की। इसके पश्चात वे पूर्व राज्य मंत्री (दर्जा प्राप्त) पं. योगेंद्र महंत के निवास स्थान पहुंचे, जहाँ उन्होंने पं. महंत और उनके परिवार जनों को शुभाशीष प्रदान किया। इस अवसर पर सुमेरु पीठाधीश्वर से भेंट करने और आशीर्वाद लेने के लिए शहर के कई धर्मप्राण, प्रबुद्ध जन और गणमान्य नागरिक एकत्रित हुए थे। शंकराचार्य ने उपस्थित प्रबुद्ध जनों से सनातन धर्म, संस्कृति के उत्थान और सामाजिक समरसता जैसे गंभीर विषयों पर गहन चर्चा की। इस दौरान उनके सचिव प्रिंसिपल टोगिया और पंडित योगेंद्र महंत अपने साथियों के साथ उपस्थित रहे। इंदौर में प्रबुद्ध जनों से भेंट के बाद शंकराचार्य जी महाराज धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला के लिए रवाना हो गए। - साक्ष्यों के आधार पर होगी सत्य की जीत धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला पहुंचकर शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रचंद्र सरस्वती महाराज ने अपने प्रमुख सहयोगियों के साथ मां सरस्वती (वाग्देवी) के दर्शन-पूजन किए और महाहवन में आहुतियां दीं। इस दौरान पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राजा भोज द्वारा स्थापित यह भोजशाला केवल एक संरचना नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की महान ज्ञान और साधना स्थली है। वसंत पंचमी के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यहाँ पूजा करने से बुद्धि शुद्ध, सात्विक और विकृतियों से मुक्त होती है। भोजशाला से जुड़े कानूनी घटनाक्रमों पर बोलते हुए सुमेरु पीठाधीश्वर ने दृढ़ता से कहा कि माननीय न्यायालय का जो भी निर्देश आया है, वह सनातनियों की विजय का सुदृढ़ आधार है। जिस प्रकार अयोध्या में पुरातात्विक साक्ष्यों से सत्य की विजय हुई, ठीक वैसे ही भोजशाला में भी साक्ष्यों के आधार पर सत्य की जीत सुनिश्चित है। सनातन को कुछ समय के लिए परेशान किया जा सकता है, परंतु पराजित नहीं। :: ग्रेनाइट की भव्य वाग्देवी प्रतिमा और गुरुकुल की मांग :: शंकराचार्य जी ने एक दूरदर्शी विज़न प्रस्तुत करते हुए सरकार से मांग की कि यहाँ मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को पुनः सम्मानपूर्वक स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मूल प्रतिमा को वापस लाने की प्रक्रिया में कोई विलंब हो रहा है, तो तत्काल इस स्थान पर ग्रेनाइट की एक विशाल और अत्यंत सुंदर मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित की जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि इस ऐतिहासिक स्थान को गुरुकुल परंपरा के आधार पर सर्व समाज की शिक्षा का एक सशक्त केंद्र बनाया जाए। धार में मुख्य अनुष्ठान संपन्न करने के पश्चात, शाम को शंकराचार्य पुनः इंदौर होते हुए बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन की ओर प्रस्थान कर गए। प्रकाश/26 मई 2026