क्षेत्रीय
26-May-2026


जोधपुर (ईएमएस)। राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर बेंच ने एक यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी को जमानत देते हुए बेहद अनोखी और सख्त शर्तें लागू की हैं। कोर्ट ने आरोपी पर एक साल तक सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। इस दौरान आरोपी इंस्टाग्राम, फेसबुक, स्नैपचैट समेत किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं कर सकेगा। अदालत ने साफ कहा कि यदि आरोपी अपने नाम, फर्जी नाम, मोबाइल नंबर या किसी अन्य ई-मेल आईडी के जरिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करता पाया गया, तो उसकी जमानत तुरंत रद्द कर दी जाएगी। यह आदेश जस्टिस अशोक कुमार जैन ने सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने आरोपी को पीड़िता और उसके परिवार से किसी भी तरह के सीधे या अप्रत्यक्ष संपर्क से भी दूर रहने का निर्देश दिया है। अदालत का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल पीड़िता पर मानसिक दबाव बना सकता है, इसलिए यह शर्त जरूरी है।मामला बीकानेर के मुक्ता प्रसाद नगर थाना क्षेत्र का है। 22 फरवरी 2026 को नाबालिग पीड़िता के पिता ने शिकायत दर्ज कराई थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया कि आरोपी ने 1 फरवरी से 20 फरवरी के बीच यौन उत्पीड़न, पीछा करने और साइबर अपराध जैसी घटनाओं को अंजाम दिया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को 24 फरवरी को गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और यानी पॉक्सो एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया। सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के वकील ने दलील दी कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस तकनीकी या भौतिक सबूत नहीं हैं। साथ ही पुलिस जांच पूरी हो चुकी है और आरोपी से आगे पूछताछ की जरूरत नहीं है। अदालत ने इन दलीलों पर विचार करते हुए चेतावनी और सख्त शर्तों के साथ आरोपी को जमानत दे दी। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपों की प्रकृति को देखते हुए, याचिकाकर्ता पर कुछ शर्तें लगाकर जमानत देना उचित समझा है, ताकि पीड़ित की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित की जा सके. जिसके तहत जमानत देते हुए जस्टिस जैन ने आरोपी को निर्देश दिया कि वह ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के अनुसार 50,000 रुपए का निजी मुचलका और उतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करे. इसके अलावा एक साल तक सोशल मीडिया पर पाबंदी भी लगाई। ईएमएस / 26/05/2026