27-May-2026
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- ईओडब्ल्यू में मामला दर्ज भोपाल (ईएमएस) । आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने राजधानी के शासकीय श्रमोदय आवासीय विद्यालय (मुगालिया छाप) में मेस भुगतान के नाम पर की गई करोड़ों रू की हेराफेरी पर कार्यवाही की है। शिकायतकर्ता सौरभ गुप्ता निवासी अयोध्या नगर, भोपाल द्वारा की गई शिकायत के आधार पर ईओडब्ल्यू ने जांच में यह प्रमाणित होने के बाद 1,55,49,498 रुपये (लगभग 1.55 करोड़ रुपये) का गबन किया गया है, इस मामले में 7 व्यक्तियों,फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड गौरव शर्मा, फर्जी फर्म के मालिक हर्ष मरजानी, कर्मचारी कुलदीप शुक्ला, विद्यालय के तीन पूर्व प्राचार्य— विजय सिंह महोबिया, संतोष सिंह सिसोदिया एवं वीरेन्द्र दुबे और विद्यालय की तत्कालीन लेखापाल लीना विश्वकर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जांच में पाया गया कि वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा मजदूरों के बच्चों को पढ़ाने वाले प्रदेश के चार श्रमोदय विद्यालयों—भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर—में मेस संचालन के लिए टेंडर जारी किया गया था। भोपाल और इंदौर विद्यालय का ठेका “कनका फूड मैनेजमेंट सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड” कंपनी को मिला था। कंपनी द्वारा विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराया जाता था तथा भुगतान कंपनी के बैंक ऑफ बड़ौदा, गोवा शाखा स्थित खाते में किया जाता था। जांच में पाया गया कि वर्ष 2023 में कंपनी में सुपरवाइजर के रूप में कार्यरत गौरव शर्मा ने धोखाधड़ी की साजिश रची। उसने असली कंपनी के नाम से “प्राइवेट लिमिटेड” शब्द हटाकर “कनका फूड मैनेजमेंट सर्विसेस” नाम से एक फर्जी फर्म तैयार कराई। यह फर्म उसके परिचित हर्ष मरजानी के नाम से बनाई गई और उसका बैंक खाता ए.यू. स्मॉल फाइनेंस बैंक, इंदौर में खुलवाया गया। जांच में यह भी पाया गया कि 27 जून 2024 को गौरव शर्मा ने फर्जी लेटरहेड तैयार कर अपने कर्मचारी कुलदीप शुक्ला के माध्यम से विद्यालय की अकाउंटेंट लीना विश्वकर्मा को एक पत्र सौंपा, जिसमें कंपनी का बैंक खाता बदलने की जानकारी दी गई थी। पत्र में कहा गया था कि भविष्य के सभी भुगतान नए बैंक खाते में किए जाएं। जांच में पाया गया कि अकाउंटेंट लीना विश्वकर्मा ने बैंक खाता बदलने जैसे अहम बदलाव के लिए नियमानुसार वरिष्ठ अधिकारियों (संयुक्त संचालक) से कोई मंजूरी नहीं ली। वह अधिकारियों से भुगतान पास कराने के लिए फाइलों (नोटशीट) पर तो असली कंपनी का नाम (कनका फूड मैनेजमेंट सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड) ही लिखती थी, लेकिन जब चेक काटने की बारी आती, तो जानबूझकर उसमें से प्राइवेट लिमिटेड शब्द गायब कर देती थी ताकि पैसा फर्जी फर्म के खाते में चला जाए। इस पूरी धोखाधड़ी में स्कूल के तीन तत्कालीन प्राचार्यों (विजय सिंह महोबिया, संतोष सिंह सिसोदिया और वीरेन्द्र दुबे) ने भी जानबूझकर मिलीभगत करते हुए इन फर्जी चेकों पर अपने हस्ताक्षर किए और करोड़ों रुपये गौरव शर्मा की डमी कंपनी में ट्रांसफर होने दिए। जाँच में यह स्पष्ट रूप से पाया गया कि यह लीना विश्वकर्मा गौरव शर्मा के साथ सीधी मिलीभगत (संलिप्तता) थी, क्योंकि वे जानती थीं कि भुगतान प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के नाम से स्वीकृत हुआ है, फिर भी वे फर्जी फर्म को भुगतान कर रही थीं जांच में यह भी पाया गया कि बैंक खाता बदलने का आधिकारिक पत्र 27 जून 2024 को स्कूल को दिया गया था, लेकिन इस फर्जी बैंक खाते में 21,95,255/- रुपये का पहला भुगतान 20/21 अक्टूबर 2023 को ही कर दिया गया था। जांच में पाया गया कि बीच में फरवरी 2025 में जब एक नए प्राचार्य प्रदीप राजावत स्कूल आए, तो उन्होंने इस चोरी को पकड़ लिया था। उन्होंने चेक पर खुद पेन से प्रा. लि. शब्द जोड़कर असली कंपनी को 21.95 लाख रुपये का सही भुगतान किया था। इससे स्कूल प्रबंधन और अकाउंटेंट को यह बिल्कुल साफ हो गया था कि असली कंपनी कौन सी है। लेकिन, जैसे ही प्रदीप राजावत का तबादला हुआ और नए प्राचार्य वीरेन्द्र दुबे आए, अकाउंटेंट लीना विश्वकर्मा और वीरेन्द्र दुबे ने मिलकर फिर से वही पुराना खेल शुरू कर दिया और फर्जी फर्म को दोबारा भुगतान करना चालू कर दिया। जांच के दौरान शिकायतकर्ता, सभी प्राचार्यों, अकाउंटेंट और बैंक अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए। साथ ही स्कूल के बिल, चेक बुक, कैशबुक और बैंकों की डिटेल ली गई। दस्तावेजों के मिलान से यह साफ हो गया कि असली कंपनी खाना परोस रही थी और भुगतान के लिए बार-बार स्कूल को मेल कर रही थी, लेकिन स्कूल के अधिकारी ठेकेदार के साथ मिलकर सरकारी खजाने का पैसा एक फर्जी बैंक खाते में डाल रहे थे। जांच में यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित हुआ कि असली कंपनी द्वारा विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा था, लेकिन सरकारी राशि सुनियोजित तरीके से फर्जी बैंक खाते में जमा कराई जा रही थी। केवल कंपनी के नाम से “प्राइवेट लिमिटेड” शब्द हटाकर मिलते-जुलते नाम की फर्जी फर्म बनाकर यह पूरा फर्जीवाड़ा किया गया। जांच में पाया गया कि निजी ठेकेदारों और सरकारी कर्मचारियों ने गरीब और मजदूर वर्ग के बच्चों के खाने के लिए आए करोड़ों रुपयों का ग़लत भुगतान किया। । केवल कंपनी के नाम से प्राइवेट लिमिटेड शब्द हटाकर एक फर्जी प्रोपराइटरशिप फर्म बनाने और अधिकारियों की साठगांठ से गलत बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर करने के इस सुनियोजित अपराध को अंजाम दिया गया। जांच में प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर सभी 7 आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023) की धारा 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र), 318(4) (धोखाधड़ी), 338 व 336(3) (दस्तावेजों में जालसाजी), 340(2) (फर्जी दस्तावेजों का असली रूप में उपयोग) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत FIR दर्ज कर अग्रिम वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। जुनेद/27 मई2026