अमेरिका और इजरायल के सैन्य अधिकारी ईरान पर हमले की टारगेट लिस्ट बना रहे हैं। इस प्रकार युद्ध विराम की घोषणा के बाद स्ट्रेट आप होर्मुज के निर्वाध परिवहन पर आशंका की काली घटाएं घिर गयी हैं। लगभग दो महीने पहले अमेरिका ने जब ईरान पर हमला किया था तभी से दुनिया भर में तेल और गैस संकट की शुरूआत हो गयी थी। दुनिया भर में तेल-गैस की राशनिंग के साथ तरह-तरह के प्रतिबंध लगाये गये लेकिन मोदी सरकार ने इस संकट की आंच दो महीने तक जनता तक बिल्कुल नहीं पहुंचने दी। सरकार की अर्थ व्यवस्था अब अतिरिक्त प्रयासों की मांग कर रही है। इसीलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की जनता से 10 मई को एक भावुक अपील की थी। इस अपील का प्रभाव मंत्रियों से गांव की चैपालों तक देखा जा रहा है। तेल की बचत करने के लिए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों के सुरक्षा काफिले में वाहन आधे कर दिये गये। कुछ मंत्री तो साइकिल से सचिवालय आते दिखे, वहीं पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए अब गांव-गांव ग्रीन चैपालें लगाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर जिले में 899 ग्राम पंचायतों में 14 मई को एक साथ ग्रीन चैपालें लगाई गयीं। इन चैपालों में लोगों को सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने, इलेक्ट्रिक वाहन का उपयोग करने पौधारोपण व जल संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गत 10 मई को जनता से जो अपील की है, उसे सामयिक, दूरदर्शी और राष्ट्रहित में माना जाना चाहिए। यह संकट लगभग 11 सप्ताह पूर्व 28 फरवरी से उस समय और गहरा हो गया जब ईरान-इज़रायल युद्ध में अमेरिका कूद पड़ा और ईरान ने दुनिया के सबसे व्यस्त ईंधन मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया। भारत ने ईरान से भी मधुर संबंध बनाए रखे और अमेरिका से भी मित्रता कायम रखी। इससे भारत ने एक तरफ रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदा, दूसरी तरफ भारत के तेल और गैस से भरे जहाज होर्मुज के रास्ते ही भारत पहुंच गये। इस बीच ऊर्जा संकट से पूरी दुनिया त्राहि-त्राहि करने लगी और इसकी आंच भारत तक भी पहुंची। मोदी सरकार ने इस अभूतपूर्व ऊर्जा संकट में देश की जनता को संकट का सामना नहीं करने दिया। पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतें आसमान पर पहुंच गयीं लेकिन भारत में चूल्हे भी जलते रहे और वाहन भी चलते रहे। हाँ, तेल और गैस के भंडार अब कम हो रहे हैं। इसलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की जागरूक जनता से बहुत सामान्य सहयोग मांगा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और महंगे ईंधन के बीच देशहित में एक अहम अपील की है। उन्होंने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए एक साल तक सोना न खरीदने, खाने के तेल की खपत कम करने, अनावश्यक वाहन उपयोग घटाकर कारपूलिंग करने और विदेश यात्राएं टालने का आग्रह किया है। प्रधानमंत्री ने कहा, देशभक्ति सिर्फ जान देना नहीं बल्कि मुश्किल वक्त में ज़िम्मेदारी से जीना भी है। प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने की अपील की। पीएम मोदी ने वर्क फ्रॉम होम करने पर ज़ोर दिया। इसके पीछे सीधा हिसाब है। दफ्तर आने-जाने में रोज़ाना लाखों लीटर पेट्रोल-डीजल जलता है। कॉर्पोरेट कंपनियाँ अगर हफ्ते में कुछ दिन भी वर्क फ्रॉम होम लागू करें तो ईंधन की खपत और आयात का बोझ दोनों कम हो सकते हैं। पीएम ने नागरिकों से अपील की है कि वे गैर जरूरी विदेश यात्रा, विदेश में छुट्टियां मनाने और विदेशी शादियों से बचकर और घरेलू पर्यटन और भारत के भीतर समारोह आयोजित करके विदेशी मुद्रा भंडार को संरक्षित करने में मदद करें। पीएम मोदी ने लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना खरीदने वाला देश है और हम हर साल करीब 59 अरब डॉलर यानी लगभग पांच लाख करोड़ रुपए का सोना बाहर से मंगाते हैं। सोने की कीमत और रुपए की कमजोरी के बीच सीधा रिश्ता है। सोना महंगा होता है तो रुपया और टूटता है। प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों को मेड-इन-इंडिया और लोकल लेवल पर बनने वाले प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित किया, जिनमें जूते, बैग और सहायक उपकरण जैसी दैनिक उपयोग की वस्तुएं शामिल हैं। भारतीय सामान खरीदने से आयात कम होगा और देश के उद्योग और रोज़गार को फायदा मिलेगा। पीएम मोदी ने किसानों से अपील कि वे रासायनिक खाद का उपयोग 50 प्रतिशत कम करें, प्राकृतिक खेती अपनाएं और डीजल पंप की जगह सौर पंप लगाएं। भारत यूरिया की अपनी ज़रूरत का 25 प्रतिशत, फास्फेट का 90 प्रतिशत और पोटाश का पूरा 100 प्रतिशत विदेश से मंगाता है। 2023-24 में सिर्फ उर्वरक सब्सिडी का बोझ 1.75 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। यूरिया बनाने के लिए प्राकृतिक गैस चाहिए जो खुद आयात होती है। पश्चिम एशिया संकट में गैस महंगी हुई तो खाद महंगी हुई और सरकार की सब्सिडी और बढ़ी। खाद का इस्तेमाल कम करें तो यह पूरी चेन टूटती है। वैश्विक ऊर्जा मार्ग स्ट्रेट आफ होर्मुज से प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चे तेल का परिवहन होता है। जहाजों का आवागमन बंद होने से इस वैश्विक संकट का प्रभाव अभूतपूर्व रहा। ब्रेंट क्रूड की कीमत 70 डाॅलर से बढ़कर 126 डालर प्रति बैरल हो गयी है। इसके परिणामस्वरूप दुनिया के कई देशों को असाधारण कदम उठाने पड़े। बांग्लादेश में ईंधन की राशनिंग हुई। श्रीलंका में चार दिवसीय कार्य सप्ताह के साथ फ्यूल पास जारी किये गये हैं। दक्षिण कोरिया ने पहली बार ईंधन मूल्य सीमा तय की है। जापान को अपना सबसे बड़ा रणनीतिक तेल भंडार उपयोग करना पड़ रहा है। भारत का लगभग 40 फीसद तेल आयात खाड़ी देशों से होता है। इस प्रकार हमारे देश को भी अभूतपूर्व ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा। भारत सरकार ने अब दो महीने बाद देश की जनता से अपना योगदान देने के लिए अपील की है जो देश-हित में है। (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) .../ 28 मई /2026