-ईरान के साथ कोई समझौता इतनी जल्दी नहीं होने वाला: रूबियो नई दिल्ली,(ईएमएस)। दुनिया एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ी है जहां एक छोटी चिंगारी भी पूरे मिडिल ईस्ट को आग में झोंक सकती है। 24 घंटे में 3 घटनाओं ने बढ़ाई टेंशन बढ़ा दी है। ईरान ने अमेरिका को सीधे जवाब देने की धमकी दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने क्वाड बैठक में साफ कहा था कि ईरान के साथ कोई समझौता इतनी जल्दी नहीं होने वाला। वहीं पाकिस्तान ने डोनाल्ड ट्रंप के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया जिसमें इजराइल को मान्यता देने की बात शामिल थी। ये तीनों घटनाएं अलग-अलग जरूर दिखती हैं लेकिन इनके तार सीधे मध्य पूर्व की उस उबलती राजनीति से जुड़े हैं जहां तेल, ताकत और रणनीति का खतरनाक बना हुआ है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सबसे बड़ी चिंता हॉर्मुज को लेकर है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इस रास्ते से ही गुजरता है और पहले से ही युद्ध में यह काफी प्रभावित रहा है जिसका असर अब पूरी दुनिया में दिख रहा है। अगर यहां तनाव एक बार फिर बढ़ा तो सिर्फ मध्य पूर्व नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था अब तक के खतरनाक स्थिति में पहुंच सकती है। बाजारों में पहले ही बेचैनी है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगर आने वाले दिनों में बातचीत आगे नहीं बढ़ी तो हालात और ज्यादा विस्फोटक हो सकते हैं। बता दें हाल के दिनों में अमेरिका ने ईरान के मिसाइल लॉन्च साइट्स और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास मौजूद कुछ नावों पर स्ट्राइक्स किए थे। अमेरिका ने इन्हें सेल्फ डिफेंस बताया लेकिन ईरान ने इसे खुली आक्रामकता माना है। इसके बाद इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कड़ा बयान जारी कर बदला लेने की चेतावनी दी है। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि पाकिस्तान भी इजराइल को मान्यता देने की दिशा में आगे बढ़े लेकिन इस्लामाबाद ने साफ इनकार कर दिया और ट्रंप को दो टूक जवाब देकर कहा कि फिलिस्तीन मुद्दे का समाधान हुए बिना ऐसा संभव नहीं। मध्य पूर्व में हालात पिछले कुछ दिनों से लगातार बदल रहे हैं। युद्ध के बाद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की खबरें जरूर सामने आ रही थीं लेकिन जमीन पर तनाव कम होता नहीं दिख रहा। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और उसके जवाब में ईरान की धमकियों ने माहौल को और ज्यादा गंभीर बना दिया है। तेल बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है और वैश्विक निवेशक भी सतर्क नजर आ रहे हैं। हॉर्मुज में किसी भी तरह की अस्थिरता दुनिया के लिए बड़ा खतरा है क्योंकि यही दुनिया के सबसे बड़े तेल रूट्स में से एक है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस पूरे संकट में सिर्फ सैन्य टकराव ही मुद्दा नहीं है बल्कि कूटनीतिक संतुलन भी दांव पर लगा हुआ है। चीन, रूस, अमेरिका और खाड़ी देशों के हित इस इलाके से जुड़े हैं। ऐसे में अगर हालात बिगड़ते हैं तो इसका असर एशिया से लेकर यूरोप तक होगा। यही वजह है कि क्वाड बैठक में भी ऊर्जा सुरक्षा और हॉर्मुज को खुला रखने का मुद्दा अहम बन गया है। सिराज/ईएमएस 28 मई 2026