- अर्जुन मुंडा की जगह निशा उरांव के नाम की चर्चा तेज़ रांची (ईएमएस)। झारखंड की सियासत में इन दिनों राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले आगामी चुनाव को लेकर सरगर्मी चरम पर है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस बार साफ कर दिया है कि वह किसी निर्दलीय के बजाय अपने ही अधिकृत उम्मीदवार को मैदान में उतारेगी। इस फैसले के बाद सियासी गलियारों में कई नामों की चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, सबसे ज्यादा ध्यान पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) की अधिकारी निशा उरांव के नामों ने खींचा है। राजनीतिक हलकों में यह कयास तेजी से लग रहे हैं कि क्या भाजपा अर्जुन मुंडा की जगह निशा उरांव पर दांव खेल सकती है। दरअसल, कांग्रेस के कद्दावर नेता और विधायक रामेश्वर उरांव की बेटी निशा उरांव के नाम के पीछे तीन मुख्य संकेत देखे जा रहे हैं। पहला, निशा इन दिनों आदिवासियों के धर्मांतरण के मुद्दे पर बेहद मुखर हैं। उन्होंने धर्मांतरण को आदिवासी संस्कृति के लिए नुकसानदेह बताते हुए भाजपा की नीतियों और बाबूलाल मरांडी के बयानों का खुलकर समर्थन किया है। दूसरा कारण है डिलिस्टिंग को लेकर उनका रुख। निशा उरांव का मानना है कि अनुसूचित जनजाति के आरक्षण का बड़ा हिस्सा धर्म बदलने वाले लोगों को मिल रहा है। उन्होंने भाजपा की तर्ज पर मांग की है कि ईसाई या मुस्लिम धर्म अपनाने वाले सरना आदिवासियों का एसटी दर्जा समाप्त किया जाए। तीसरा संकेत नई दिल्ली में हुए जनजातीय समागम में उनकी सक्रिय भागीदारी है, जहां उन्होंने सरना आदिवासियों को सनातन से जोड़ने वाली भाजपा की विचारधारा का समर्थन किया था। संख्या बल के लिहाज से भाजपा के पास फिलहाल 21 विधायक हैं और सहयोगियों को मिलाकर यह आंकड़ा 24 तक पहुंचता है। जीत के लिए जरूरी 28 वोटों के लिए भाजपा को सत्तापक्ष के कुछ विधायकों की मदद की दरकार होगी। ऐसे में कांग्रेस विधायक की बेटी निशा उरांव को उम्मीदवार बनाकर भाजपा विपक्ष में सेंधमारी का एक बड़ा दांव चल सकती है। रामयश/ईएमएस 28 मई 2026