- डिंडोरी के पांच युवक तीन दिन तक थाने में रखे गए, प्रताड़ना के बाद चोरी के झूठे आरोप लगाए। मंडला (ईएमएस)। डिंडोरी जिले के पांच आदिवासी मजदूरों को मंडला थाने में तीन दिन तक अवैध हिरासत में रखने और मारपीट का आरोप लगा है। मजदूरों का आरोप है कि १३ से १५ मई के बीच पुलिस ने उन्हें बिना वैधानिक प्रक्रिया या पर्याप्त साक्ष्य के हिरासत में लिया, अमानवीय प्रताड़ना दी और चोरी के झूठे आरोप लगाए। पीड़ितों में भागवत मरकाम (युवक, पिता असुधू मरकाम, ग्राम तेन्दूडीह, थाना शाहपुरा), नरेश मरावी (युवक, पिता मनीराम, ग्राम तेन्दूडीह, थाना शाहपुरा), माया लोहार (युवक, पिता तोप सिंह, डिंडोरी), नरेंद्र मरावी (युवक, पिता विजयशाह मरावी, ग्राम डूबा, थाना शाहपुरा) और सुखनंदन मरावी (युवक, पिता दलशाह मरावी, ग्राम मुन्नागटोला, थाना मेहंदवानी) शामिल हैं। ये सभी गरीब आदिवासी परिवार से हैं और मंडला में मजदूरी करने आए थे। मजदूरों के अनुसार, उन्हें २४ घंटे से अधिक थाने में रखा गया और बेरहमी से पीटा गया, जिससे चोट के निशान भी हैं। यह कृत्य भारतीय संवीक्षान के अनुच्छेद २१, २२ और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम १९८९ का गंभीर उल्लंघन है। पीड़ितों ने मामले की निष्पक्ष कार्रवाई, दोषी थाना प्रभारी व पुलिसकर्मियों के तत्काल निलंबन, उनके विरुद्ध अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम व भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने, विधिक सहायता, सुरक्षा और उचित मुआवजे की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि कार्रवाई न होने पर आदिवासी समाज व मानवाधिकार संगठन लोकतांत्रिक आंदोलन और न्यायिक कार्रवाई को बाध्य होंगे। ईएमएस/मोहने/ 28 मई 2026