राष्ट्रीय
28-May-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। देश में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों के साथ-साथ सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई की चिंता भी बढ़ा दी है। पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों के कारण भारत पर आर्थिक दबाव तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे महंगाई, रुपये की कमजोरी और व्यापार घाटे जैसी समस्याएं और गहरा सकती हैं। पिछले करीब दो सप्ताह में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। तेल विपणन कंपनियों ने कम समय में कई बार कीमतें बढ़ाई हैं, जिससे परिवहन और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत बढ़ने लगी है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ईंधन महंगा होने से खुदरा महंगाई दर 5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इससे आरबीआई के लिए ब्याज दरों को लेकर फैसला लेना और मुश्किल हो जाएगा। यदि महंगाई लगातार बढ़ती रही तो केंद्रीय बैंक को सख्त मौद्रिक नीति अपनानी पड़ सकती है। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा पहले ही संकेत दे चुके हैं कि यदि पश्चिम एशिया संकट लंबा चला तो सरकार को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की महंगी खरीद से भुगतान संतुलन यानी बीओपी और चालू खाते के घाटे पर भी दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं तो इसका असर आम आदमी की जेब, परिवहन खर्च, खाद्य वस्तुओं की कीमतों और आर्थिक विकास दर पर भी पड़ सकता है। सुबोध/२८ -०५-२०२६