क्षेत्रीय
28-May-2026
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- शहर काजी ने की गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग; हजारों नमाजियों ने हाथ उठाकर किया समर्थन इंदौर (ईएमएस)। आज ईद-उल-अज़हा (बकरीद) के मुकद्दस मौके पर इंदौर के सदर बाजार स्थित ऐतिहासिक ईदगाह मैदान से सांप्रदायिक सौहार्द, आपसी सम्मान और पर्यावरण संरक्षण की एक अभूतपूर्व मिसाल सामने आई है। ईद की नमाज के बाद आयोजित विशाल दीनी व सामाजिक समागम में शहर काजी इशरत अली ने सार्वजनिक मंच से भारत सरकार के समक्ष गाय (गौमाता) को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने का प्रस्ताव रखा। काजी साहब की इस प्रगतिशील पहल का वहां मौजूद हजारों नमाजियों और मुस्लिम समाज के प्रबुद्धजनों ने एक सुर में अपने दोनों हाथ हवा में उठाकर और गगनभेदी नारों के साथ ऐतिहासिक समर्थन किया। देश की साझी संस्कृति पर बल देते हुए शहर काजी ने कहा कि भारतीय परंपरा में गाय को माता का पावन दर्जा प्राप्त है और बहुसंख्यक समाज की आस्था इससे गहराई से जुड़ी है। समाज से आपसी नफरत, गलतफहमियों और विवादों को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए यह समय की मांग है कि सरकार गोवंश को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा दे, जिससे इसकी तस्करी और अवैध वध पर पूरी तरह रोक लग सके और देश में भाईचारा और मजबूत हो। यह अपील बहुसंख्यक समाज की आस्था के प्रति मुस्लिम समुदाय के गहरे सम्मान को दर्शाती है। इस ऐतिहासिक मंच से शहर काजी ने गिरते भूजल स्तर और पर्यावरण संकट पर भी समाज को सचेत किया। उन्होंने आह्वान किया कि आगामी मानसून में बारिश की एक-एक बूंद को सहेजना हर नागरिक का मजहबी और सामाजिक दायित्व है, इसलिए हर घर, मस्जिद और मदरसे में रैन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाया जाए। साथ ही, उन्होंने विकास के नाम पर कटते पेड़ों पर चिंता जताते हुए बड़े पैमाने पर पौधारोपण करने और विशेष रूप से स्वास्थ्य व पर्यावरण के लिए मुफीद सहजन के पौधे लगाने का संकल्प दिलाया। - मजहब से ऊपर मोहब्बत इंदौर में ईद के इस जश्न के बीच आपसी सौहार्द का एक और अनोखा रंग तब देखने को मिला, जब एक हिंदू सलवाड़िया परिवार ने अपनी आधी सदी (50 वर्ष) पुरानी परंपरा को पूरी शिद्दत से निभाया। यह परिवार शहर काजी इशरत अली को उनके राज मोहल्ला स्थित निवास से ईदगाह मैदान तक पूरी आन-बान-शान के साथ शाही बग्घी में ससम्मान लेकर आया और नमाज के उपरांत वापस छोड़कर आया। सत्यनारायण सलवाड़िया ने भावुक होकर बताया कि उनके पूज्य पिताजी द्वारा शुरू की गई प्रेम की यह रीत आज उनकी नई पीढ़ी भी पूरे दिल से निभा रही है, जो यह साबित करती है कि आपसी मोहब्बत और इंसानी रिश्ते मजहब की दीवारों से कहीं ऊपर हैं। प्रकाश/28 मई 2026