राज्य
29-May-2026
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- सीसीटीवी ने खोली झूठे आरोपों की पोल अलीगढ़ (ईएमएस)। मरीजों की सेवा और देखभाल में दिन-रात जुटे रहने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा एक बार फिर बड़े सवालों के घेरे में है। मोहनलाल गौतम राजकीय जिला महिला अस्पताल से एक बेहद शर्मनाक और आक्रोशित करने वाला मामला सामने आया है, जहां कुछ रसूखदार और असंवेदनशील तीमारदारों ने अपनी मर्यादाओं को ताक पर रखकर एक निर्दोष अस्पताल कर्मचारी की बेरहमी से पिटाई कर दी। शुरुआत में इस घटना को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पेश कर अफवाह फैलाने की कोशिश की गई थी, लेकिन अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है। सच्चाई सामने आते ही तीमारदारों की इस कायराना हरकत के खिलाफ अस्पताल स्टाफ और आम जनता में भारी आक्रोश है। : मामूली बात पर भड़के तीमारदार, मर्यादा की सारी हदें पार कीं वास्तविक घटना के अनुसार, अस्पताल का एक कर्मचारी ड्यूटी के बीच समय निकालकर अपना खाना खा रहा था। उसी समय वहां मौजूद कुछ तीमारदार (मरीज के तीमारदार) बिना किसी वजह के बार-बार लाइट को ऑन-ऑफ (चालू-बंद) कर रहे थे। चूंकि गर्मी और बरसात के मौसम में लाइट के आसपास कीड़े मकोड़े जमा हो जाते हैं, इसलिए कर्मचारी ने बेहद शालीनता से उनसे आग्रह किया, कृपया लाइट को बार-बार बंद-चालू न करें, इससे मेरे खाने में कीड़े गिर सकते हैं। एक इंसान होने के नाते शांति से भोजन करने का अधिकार हर किसी को है, लेकिन तीमारदारों को कर्मचारी की यह जायज बात इतनी नागवार गुजरी कि उन्होंने अपना आपा खो दिया। विरोध करने पर उन लोगों ने सारी मानवीय संवेदनाएं भुलाकर उस निहत्थे कर्मचारी पर धावा बोल दिया और उसे जमकर पीटा। सीसीटीवी ने बेनकाब किए असली गुंडे घटना के तुरंत बाद, अपनी गलती छुपाने और खुद को पीड़ित दिखाने के लिए तीमारदारों ने वीडियो को सोशल मीडिया पर गलत संदर्भ के साथ वायरल कर दिया, ताकि अस्पताल प्रशासन और कर्मचारी को बदनाम किया जा सके। सच्चाई का खुलासा अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जब गहनता से जांच की गई, तो पूरी साजिश बेनकाब हो गई। फुटेज से साफ जाहिर है कि अस्पताल कर्मचारी पूरी तरह निर्दोष था। वह केवल अपना भोजन कर रहा था और पूरी गलती उन हुड़दंगी तीमारदारों की थी, जिन्होंने न केवल अस्पताल के शांतिपूर्ण माहौल को खराब किया बल्कि एक ऑन-ड्यूटी कर्मी पर जानलेवा हमला भी किया। तीमारदारों की इस ओछी हरकत का कड़ा विरोध होना जरूरी अस्पतालों को जीवन बचाने का स्थान माना जाता है, न कि हिंसा का अखाड़ा। रात-दिन अपनी परवाह किए बिना मरीजों की सेवा करने वाले कर्मचारियों के साथ अगर इस तरह का हिंसक व्यवहार होगा, तो कोई भी कर्मी सुरक्षित महसूस नहीं कर पाएगा। कानूनी कार्रवाई की मांगरू सोशल मीडिया पर गलत वीडियो फैलाकर भ्रम पैदा करने वाले और कर्मचारी के साथ मारपीट करने वाले इन उपद्रवी तीमारदारों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। अस्पताल कर्मियों की सुरक्षा प्रशासन को ऐसे तत्वों को कड़ा संदेश देना होगा ताकि भविष्य में कोई भी तीमारदार किसी डॉक्टर, नर्स या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर हाथ उठाने की हिम्मत न कर सके। इस पूरी घटना ने साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया की हर चमकती चीज सच नहीं होती। इस गहरी निंदनीय घटना में पीड़ित कर्मचारी के साथ पूरा समाज खड़ा है और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने की पुरजोर मांग करता है। ईएमएस/धर्मेन्द्र राघव/ 29 मई 2026