राज्य
29-May-2026
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:: हरिधाम आश्रम में हनुमत महायज्ञ और राम कथा की पूर्णाहुति; 25 गांवों के भक्तों के लिए हुआ विशाल भंडारा :: इंदौर (ईएमएस)। प्रभु राम धर्म, मर्यादा और संस्कृति की शाश्वत मूर्ति हैं। वे भारत भूमि का चरित्र, शील, संयम, सदाचार और नैतिकता हैं, जबकि श्री कृष्ण माधुर्य, दर्शन और मनीषी के प्रतिरूप हैं। चारों भाइयों के बीच समर्पण, त्याग और अपनत्व के जो उदाहरण रामायण में मिलते हैं, उनकी मिसाल दुनिया के किसी अन्य ग्रंथ में नहीं है। इसीलिए राम हर युग में वन्दनीय हैं। यह दिव्य विचार श्रीधाम वृन्दावन के प्रख्यात कथाकार पं. श्रीराम प्रपन्नाचार्य महाराज ने व्यक्त किए। वे शुक्रवार को हवा बंगला (कैट रोड) स्थित हरिधाम आश्रम पर अधिकमास के उपलक्ष्य में आयोजित आठ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि यदि हम धर्म के मार्ग पर चलकर राम का नियमित स्मरण करें, तो यह भी श्रेष्ठ आचरण है। आज भी भारतीय परिवारों में कैकेयी, शूर्पणखा और मंथरा जैसे नाम नहीं रखे जाते, क्योंकि इन्होंने अपने कर्मों से अपने नामों को लांछित कर दिया। राम कथा की सार्थकता यही है कि हम उनके आदर्शों को घर-घर तक पहुंचाएं। अनुष्ठान के दौरान वृन्दावन से आए भजन गायकों की प्रस्तुतियों ने भक्तों को मंत्रमुग्ध बनाए रखा। कथा शुभारंभ के पूर्व आश्रम के अधिष्ठाता महंत शुकदेवदास महाराज के सानिध्य में समाजसेवी विष्णु बिंदल, टीकमचंद गर्ग, दिनेश मित्तल, गोपाल गोयल और अन्य प्रबुद्धजनों ने व्यास पीठ का पूजन किया। :: महायज्ञ में दी गईं 12.80 लाख आहुतियां :: आश्रम परिसर में निर्मित यज्ञशाला में महंत शुकदेवदास महाराज के सानिध्य एवं यज्ञाचार्य पं. ललित पाठक के निर्देशन में 51 विद्वानों द्वारा प्रतिदिन हनुमत महायज्ञ संपन्न कराया गया। इस महायज्ञ में 11 लाख आहुतियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके मुकाबले आठवें दिन दोपहर में कवन सो काज कठिन जग माही महामंत्र के साथ कुल 12 लाख 80 हजार आहुतियां सौल्लास पूरी हुईं। अंतिम आहुति डलते ही पूरा परिसर जयघोष से गूंज उठा, जिसके बाद बीमार और दिव्यांगों सहित बड़ी संख्या में भक्तों ने यज्ञशाला की परिक्रमा की। इस धार्मिक उत्सव की पूर्णाहुति पर इंदौर शहर के अलावा आसपास के 25 गांवों के 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी का पुण्यलाभ उठाया। पूरे कार्यक्रम में व्यवस्थाएं संभालने में स्वदेशी जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने सराहनीय सहयोग दिया। समापन पर यज्ञाचार्य पं. ललित पाठक, कथाकार पं. श्रीराम प्रपन्नाचार्य एवं सहयोगी विद्वानों का विशेष सम्मान किया गया।