मुंबई (ईएमएस)। हाल ही में अपनी शानदार गायकी के लिए मशहूर शान ने सिंगिंग रियलिटी शो ‘इंडियन आइडल’ में बॉलीवुड के सदाबहार गीत ‘बाहों में चले आओ’ की जमकर तारीफ की। शान ने कहा कि इस गाने में जिस तरह संगीत, भावनाएं और बदलाव देखने को मिलते हैं, वैसा आज भी बहुत कम गानों में नजर आता है। शो के दौरान कंटेस्टेंट ज्योतिर्मयी ने ‘बाहों में चले आओ’ गीत पर प्रस्तुति दी। उनकी परफॉर्मेंस से प्रभावित होकर शान ने इस गाने की खासियतों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि यह गीत केवल एक रोमांटिक धुन नहीं है, बल्कि इसमें संगीत और भावनाओं का बेहद खूबसूरत मेल दिखाई देता है। शान के मुताबिक यह गाना रात के माहौल में एक कमरे के अंदर फिल्माया गया था, जहां संजीव कुमार, जया बच्चन से धीरे से गाने के लिए कहते हैं और उसी पल से गाने का पूरा मूड बदल जाता है। उन्होंने कहा कि यही बदलाव इस गीत को खास बनाता है। शान ने पुराने और नए गानों को लेकर चलने वाली बहस पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कई लोग पुराने और नए दौर के संगीत की तुलना करते रहते हैं, लेकिन उनके मुताबिक पुराने दौर के कई गाने आज के गानों से कहीं ज्यादा आधुनिक सोच वाले थे। उन्होंने कहा कि इन गीतों में संगीत जिस तरह बहता है और जिस खूबसूरती से बदलाव आते हैं, वह आज भी दुर्लभ है। शान ने कहा कि कई बार इन गानों को सुनते हुए यह समझ ही नहीं आता कि गाना कहां से शुरू हुआ और कहां खत्म हो गया, और यही उनकी सबसे बड़ी खूबसूरती है। इस दौरान शान ने मशहूर संगीतकार आर.डी. बर्मन की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि पंचम दा अपने समय से काफी आगे की सोच रखते थे और उनके संगीत में हमेशा कुछ नया और अलग सुनने को मिलता था। शान के मुताबिक पंचम दा हिंदी फिल्म संगीत के सबसे मॉडर्न संगीतकारों में से एक थे। उन्होंने कहा कि जिस तरह आर.डी. बर्मन संगीत में प्रयोग करते थे, वैसा आज भी बहुत कम संगीतकार कर पाते हैं। उनके बनाए गीत आज भी ताजगी और नवीनता का एहसास कराते हैं। शो के जज विशाल ददलानी ने भी शान की बात से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि पंचम दा जैसा संगीतकार दूसरा नहीं हो सकता और उनका संगीत केवल सुना नहीं बल्कि महसूस किया जाता है। इस मौके पर शान ने प्रतियोगियों को एक अहम सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी गाने को सही तरीके से गाने के लिए केवल सुर और शब्दों पर ध्यान देना काफी नहीं होता। गायक को यह भी समझना चाहिए कि फिल्म में वह गीत किस परिस्थिति में इस्तेमाल किया गया है। सुदामा/ईएमएस 30 मई 2026